Sidhi- निजी स्कूलों की मनमानी से परेशान अभिभावक,शासन के नियमों को दिखा रहे अंगूठा,अभिभावकों पर मनमानी फीस और किताबों का बोझ
सीधी- सरकार चाहे जितने कदम उठा ले और जितने ही नियम बना ले लेकिन मैदानी हमले की निष्क्रियता और साथ घाट के चलते उन नियमों का पालन नहीं हो पता हाल ही में प्रदेश के मुखिया द्वारा निजी स्कूलों की मनमानी फीस कॉपी किताब और ड्रेस को लेकर भले ही लंबे चौड़े नियम बताए गए लेकिन उनका पालन बड़े शहरों के अलावा छोटे शहरों में देखने को नहीं मिल रहा यहां स्कूल प्रबंधन द्वारा मनमानी फीस और मनमानी किताबें अभिभावकों पर थोपी जा रही हैं और अभिभावकों द्वारा इसका विरोध भी खुले तौर पर नहीं किया जा रहा लेकिन नियमों को सही करने की जिनकी जिम्मेदारी है वह बस को रामपूर्ति करने पर लगे हुए हैं।
गौरतलब है कि जिले में संचालित ज्यादातर विद्यालयों में मनमानी फीस वसूली जा रही है मंथली ट्यूशन फीस के साथ-साथ एक मोटी रकम अन्य सुविधाओं के लिए भी अभिभावकों से ली जा रही है लेकिन इस ओर किसी का भी ध्यान नहीं है। गौर करने वाली बात है कि प्राइमरी तक के बच्चों की फीस 40 से ₹50 हजार तक कुछ प्राइवेट विद्यालयों द्वारा निर्धारित की गई है। शासन द्वारा भले ही कई बार दिशा निर्देश जारी किए गए लेकिन जिम्मेदारों की अनदेखी के चलते यह काम लंबे समय से चल रहा है। छोटे-छोटे बच्चों को पुस्तक के नाम पर भारी बस्ते का बोझ ढोना पड़ रहा है। यहां शासन द्वारा निर्धारित पुस्तकों को दरकिनार कर मनमाने पब्लिशर्स की दर्जनों किताबें खरीदने पर मजबूर किया जा रहा है। जिला कार्यालय के समीप स्थित चर्चित विद्यालय की अगर जांच की जाए तो वहां के अभिभावकों का दर्द स्पष्ट सामने आएगा। यहां छोटे-छोटे बच्चे भारी भरकम बस्ता उठाए देखे जाते हैं साथ ही यहां की स्कूल फीस देख कर तो लोगों के होश ही उड़ रहे हैं। यहाँ 4 और पांचवी के बच्चों को 12-12 किताबों की लिस्ट थमाई गईं है जबकि एनसीआरटी की 4 या पांच ही किताबे लिस्ट में है बाकी सब मनमानी पब्लिशर्स की है।

जिला प्रशासन ने ली बैठक,स्कूल संचालकों को दी हिदायत
जिला प्रशासन द्वारा आज निजी विद्यालयों के प्राचार्य संचालकों एवं पुस्तक वी यूनिफॉर्म विक्रेताओं की बैठक जिला पंचायत में ली गई थी और उन्हें समझाइए दी गई जिला पंचायत सीईओ द्वारा उन्हें सेवा भाव के साथ काम करने की हिदायत भी दी गई लेकिन देखने वाली बात यह होगी कि इस बैठक का असर स्कूलों पर पड़ता है या नहीं…?जिला कार्यालय के पास स्थित जिले की सबसे चर्चित विद्यालय का हाल एक बार देखने लायक है यहां मनमानी फीस और मनमानी पुस्तक खरीदने की लिस्ट चस्पा हो चुकी है जो सभी के लिए चिंता का विषय है।
मुख्यमंत्री दे चुके हैं निर्देश

विगत दिनों मुख्यमंत्री द्वारा प्रमुख सचिव को निर्देशित करते हुए कहा गया था कि स्कूल प्रबंधकों की पहली बार शिकायत मिलने पर स्कूल संचालक के खिलाफ स्कूल शिक्षा विभाग मध्यप्रदेश निजी विद्यालय (फीस तथा संबंधित विषयों का विनिमियन) नियम 2020 के तहत 2 लाख तक का जुर्माना लगाया जाएगा। सरकार को चाहिए कि मिशनरी स्कूलों में सिर्फ एनसीआरटीई की बुक पढाई जाय, इससे पूरी तरह से कमिशन खोरी में बैन लग जाएगा। अभि स्कूल संचालक पांच बुक तो एनसीआरटीई की पढाते हैं, साथ में कई बुक अपनी इच्छाअनुसार बच्चों पर थोप देते हैं। जिससे अभिभावक स्कूल संचालकों की पंसद की दुकान से किताबें खरीदने के लिए मजबूर हो रहा है। सरकार को चाहिए कि ऐसे स्कूल संचालकों के खिलाफ भी कार्रवाई करे तो आवश्यकता से अधिक बुकों का बोझ बच्चों पर डाल रहे।
बता दे कि सीधी जिले में यही सब हो रहा है यहां दो चार किताबें एनसीईआरटी की और ज्यादातर अन्य पब्लिशर्स की लिस्ट में जोड़ दी गई है और मजबूरन अभिभावकों को यह सभी किताबें दुकानदार से लेनी पड़ती हैं दुकानदारों द्वारा भी यह कहा जाता है कि किताबों का सेट जो है वही दिया जाएगा बावजूद इसके ना तो स्कूल में चश्मा लिस्ट देखी जा रही है ना ही विद्यालय प्रबंधन को इस बारे में निर्देशित किया जा रहा है।
मेरे संज्ञान में आया है कि कुछ निजी स्कूलों द्वारा पालकों को कोर्स की किताबें, यूनिफार्म और अन्य शिक्षण सामग्री किसी निर्धारित दुकान से खरीदने के लिए बाध्य किया जा रहा है, जो कि उचित नहीं है।
मैंने इस सम्बन्ध में कार्रवाई करने के लिए मुख्य सचिव को निर्देश दिये हैं। स्कूल शिक्षा…
— Dr Mohan Yadav (Modi Ka Parivar) (@DrMohanYadav51) April 1, 2024








