राष्ट्रीय डेंगू दिवस पर कुसमी मे हुआ जागरुकता कार्यक्रम का आयोजन
अमित श्रीवास्तव।
16 मई को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कुसमी में मुख्य खण्ड चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर अजय प्रजापति सर के मार्ग दर्शन में राष्ट्रीय डेंगू दिवस मनाया गया। इस हेतु अस्पताल में आयोजित जागरुकता कार्यशाला में डॉक्टर सुधीर गुप्ता के द्वारा डेंगू रोग की उत्पत्ति एवम उसके लक्षण व बचाव की जानकारी दी। इस अवसर मलेरिया टेक्नीकल सुपर वाइजर कुसमी द्वारा कुसमी बाजार में लोगो को जागरुक किया इस मौके पर आशा कार्यकर्ता व क्षेत्रीय कर्मचारी ANM,MPW, आशा पर्यवेक्षक उपस्थित रहे। उल्लेखनीय है 16 मई 2024 को राष्ट्रीय डेंगू दिवस के तारतम्य में वेक्टर जनित रोग डेंगू की जानकारी लक्षण, रोकथाम, बचाव, प्रबंधन हेतु सभी प्राथमिक स्वास्थ केन्द्र, उप स्वास्थ्य केन्द्र,ग्रामो में रैलियों एवं बैठकों के माध्यम से जनसमुदाय को जागरूकता लाई गई । इसी क्रम में बीपीएम कुसमी अरविंद कुमार द्विवेदी व बी सी एम कुसमी देवेंद्र कुमार सिंह ने डेंगू रोग के बारे में सामान्य जानकारी दिए। उन्होंने बताया कि देश को डेंगू मुक्त करने का लक्ष्य आज हमारे सामने है। ऐसा तभी संभव है। जब सब समुदाय के लोगों को डेंगू के विषय में सही जानकारी हो।
इसके लिए सबसे जरूरी है मच्छरों की रोकथाम की जाए। यह रोग एडीज एजिप्टी मादा मच्छर के काटने से संचालित होता है। इसे हड्डी तोड़ बुखार भी कहते है। यह वायरल रोग है, इसके लक्षणों में अत्यधिक बुखार होना , शरीर पर चक्कते होना, पूरे शरीर मे दर्द, सांस लेने में तकलीफ होना, उल्टी होना, चक्कर आना, बेहोशी होना इत्यादि लक्षण होते हैं। डेंगू होने पर जो सावधानी बरती जानी हैं उनमें रोगी का स्वयं उपचार न करें। बुखार में पेरासिटामोल दें, सिर पर पानी की पट्टी रखें, पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ पीने को देें रोगी को एस्प्रिन, ब्रूफेन, बेबोरन टेबलेट न दिए जाएं तथा तुरंत चिकित्सक को दिखाएं। मच्छर के रोकथाम हेतु आसपास पानी जमा न होने दें, गडढों को मिट्टी से भर दिया जाएं। नालियों में पानी जमा न होने देकर सफाई कराएं। आसपास जमा पानी में मिट्टी का तेल, जला हुआ आइल डलवा देें। कूलर, फूलदानों, नांद का पानी एक सप्ताह में खाली करें एवं पुन: साफ पानी भरें। घर में टूटे फूटे डिब्बे, टायर, बर्तन, बोतलें इत्यादि न रखें। घर के दरवाजे, खिड़कियों में महीन जाली लगाकर मच्छरों को रोकें। मच्छरों को मारने, भगाने के लिए मच्छरनाशक क्रीम, स्प्रे मेट्स क्विल्स इत्यादि का इस्तेमाल करने, नीम की पत्तियों का धुआं एवं मच्छरदानियों का उपयोग किया जाने की जानकारी दी गई। उपरोक्त कार्यक्रम का संचालन मलेरिया टेक्नीकल सुपर वाइजर सुभाष सोनी कुसमी द्वारा किया गया।








