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Katni News: बांधवगढ़ के बाघों ने बनाया बरही के जंगलों को ठिकाना, वन विभाग खातिरदारी में जुटा

Katni News: बांधवगढ़ के बाघों ने बनाया बरही के जंगलों को ठिकाना, वन विभाग खातिरदारी में जुटा

कटनी। पड़ोसी जिले बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघों के बढ़ते कुनबे ने कटनी के जंगलों को भी आबाद किया हुआ है। गर्मी के दिनों में बड़वारा परिक्षेत्र के बरही के जंगलों में इन दिनों डेढ़ दर्जन बाघों की चहलकदमी है। बाघ जंगल से बाहर न आए, इसको लेकर वन विभाग भी उनकी खातिरदारी में जुटा हुआ है।जंगल के अंदर बनाए गए सोंसर व तालाबों में टैंकरों से पानी भरवाया जा रहा है। बरही के कुआं, करेला, सलैया सिहोरा, झिरिया, लुरमी, बंजर बरेला, मचमचा, करौंदी खुर्द, करौंदी कला, कुठिया महगवां, ताली रोहनिया, पिपरिया कला, गढ़ौहा सहित अन्य गांवों में जंगल जाने वालों को आए दिन बाघ के दर्शन होते रहे हैं। बांधवगढ़ की सीमा से सटे जंगलों में इन दिन लगभग 18 बाघ चहलकदमी कर रहे हैं। जिनमें से कभी-कभार लोगों को रास्ता पार करते समय भी बाघों के दीदार होते हैं। बाघों के साथ ही शावकों सहित बाघिनों ने भी अलग-अलग क्षेत्रों में अपना ठिकाना बनाया हुआ है।

वर्चस्व की लड़ाई, सुरक्षा को लेकर बरही का रूख

वन विभाग के अधिकारियों की मानें तो बांधवगढ़ में तेजी से बढ़े बाघों के कारण उनको अपना क्षेत्र बचाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है और इसके चलते कई बाघों ने बरही क्षेत्र के जंगलों को अपना ठिकाना बना लिया है। वर्चस्व की लड़ाई से बचने के लिए वे साल भर बरही के जंगलों में घूमते फिरते और शिकार करने पहुंचते हैं। दूसरी ओर बाघिन शावकों के साथ यहां के जंगलों में देखने को मिलती हैं। उसका कारण यह है कि शावकों को बड़े बाघों से खतरा रहता है और उनकी सुरक्षा को लेकर वे बरही के जंगलों को बांधवगढ़ से अधिक सुरक्षित मानती हैं। जिसके लिए वे बरही से लेकर ढीमरखेड़ा वन परिक्षेत्र के शाहडार के घने जंगल तक विचरण करते हैं।

बाहर न निकलें, जंगल में पानी की उपलब्धता

पिछले वर्षों में गर्मी के दिनों में आए दिन लोगों को गांव के किनारे व सड़कों पर बाघ देखने को मिलते थे। उसका कारण माना जाता है कि जंगल में पानी की कमी के कारण बाघ गांवों के नजदीक के जल स्त्रोतों के आसपास पहुंचते थे। जिससे उनकी जान और आमजन की जान को भी खतरा रहता था। इस साल गर्मी शुरू होने के साथ ही वन विभाग उनकी सेवा में जुट गया है ताकि वे जंगल में ही शिकार करें और वहीं पर उनको पानी की उपलब्धता हो।

इसके लिए जंगलों के बीचों-बीच बनाए गए सोंसरों में लगातार पानी भरवाने का काम वन अमला कर रहा है तो दूसरी ओर जंगल के अंदर के छाेटे-छोटे तालाबों में भी टैंकरों के माध्यम से पानी भरवाया जा रहा है। इसके पीछे एक कारण यह भी है कि बाघों को पानी के साथ ही जल स्रोतों के आसपास उनको शिकार भी उपलब्ध हो जाते हैं। इसमें वन समितियों का भी सहयोग वन विभाग ले रहा है। पानी की उपलब्धता के चलते इस साल अभी तक बरही क्षेत्र में गांवों के आसपास बाघों की चहलकदमी न के बराबर रही है।

बांधवगढ़ में बाघों की संख्या बढ़ने से बरही के जंगलों में पिछले कुछ वर्षों से बाघों की चहलकदमी बढ़ी है। वर्तमान में बाघ, बाघिन व शावक मिलाकर लगभग डेढ़ दर्जन वन्यप्राणी बरही के जंगलों में विचरण कर रहे हैं। जिनको जंगल के अंदर ही पानी उपलब्ध कराने का कार्य कराया जा रहा है ताकि वे बाहर न आए। इसके साथ ही उनकी सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखा जा रहा है। -गौरव शर्मा, वन संरक्षक, कटनी

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