Sidhi24news:अव्यवस्था के आगोश में जिला चिकित्सालय सीधी
-जिला चिकित्सालय का निरीक्षण करने पहुंची सीधी विधायक, दिए आवश्यक दिशा निर्देश
सीधी विधायक रीती पाठक द्वारा आज जिला चिकित्सालय में मूलभूत सुविधाओं का निरीक्षण कर वार्ड में भर्ती मरीजों से चिकित्सा सुविधाओं के विषय में सीधे जानकारी ली गई। मरीजों से पूछा कि उन्हें अस्पताल से दवाएं मिलती हैं या नहीं और ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर मरीजों को देखते हैं या नहीं।निरीक्षण के दौरान ड्यूटी रजिस्टर, एनसीआर वार्ड, पीएनसी वार्ड, प्री डिलीवरी वार्ड, ओटी कक्ष, हीट बेब वार्ड निरीक्षण कर उपस्थित मरीजों से वार्तालाप किया एवं खानपान के बारे में जानकारी लिए कर्मचारियों को ड्रेस कोड में रहने आदि के सम्बंध में निर्माण कार्य एवं मरीजों को बेहतर इलाज व सुविधाएं उपलब्ध कराने हेतुअस्पताल के वार्डों का सघन निरीक्षण करते हुए साफ सफाई एवं दवाओं की उपलब्धता को देखा एवं चिकित्सा प्रणाली को बेहतर से बेहतर बनाने के सम्बंधित को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

जिला चिकित्सालय का हाल बेहाल, मरीज होते हैं परेशान
जिला चिकित्सालय का भले ही आज सीधी विधायक द्वारा औचक निरीक्षण कर आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए लेकिन वहां पर मरीज को लेकर पहुंचने वाले लोग जिला चिकित्सालय की वास्तविकता से ज्यादा अच्छी तरह से परिचित है। सवेरे से ओपीडी में डॉक्टर का इंतजार करते मरीजों को दोपहर तक में तो डॉक्टर नसीब हो पाते हैं उसके बाद जांच और दवा की लाइन में लगे लगे उनका हाल बेहाल हो जाता है। नेताओं द्वारा यदि बिना ताम- झाम के किसी दिन निर्धारित समय पर जिला चिकित्सालय में चुपचाप निरीक्षण किया जाए तो वस्तुतः स्थिति सामने आएगी।
एक मरीज को दवा मिलने में करीब 2 दिन का समय लग जाता है कारण की सुबह से लाइन में लगे लगे जब डॉक्टरों से परामर्श मिलता है और जांच होती है तो जांच रिपोर्ट आने में दोपहर बाद डॉक्टर ही नहीं मिल पाते हैं। फिर डॉक्टर को दिखाने के बाद दवा की लाइफ इतनी बड़ी होती है की कई मरीज बिना दवाइयां लिए ही वापस चले जाते हैं।
कहने को तो भारी भरकम जिला चिकित्सालय की बिल्डिंग बनी हुई है लेकिन अस्पताल से अधिक मरीज शासकीय चिकित्सकों के बंगलो पर नजर आते हैं या फिर जिला चिकित्सालय के आसपास खुली सरकारी डॉक्टरों की प्राइवेट क्लिनिको में जहां जांच और दवा के नाम पर मरीज से मोटी रकम ऐठी जाती है निर्धारित समय पर तो जिला चिकित्सालय में चिकित्सकों का मिलना भगवान से मिलने के बराबर ही है। कहीं ना कहीं कोई बहाना बनाकर यह अपने काम से नदारत रहते हैं आए दिन इसकी शिकायत भी होती रहती है लेकिन शिकायत के बाद केवल कोरमपूर्ति होती है कार्यवाही कभी नहीं हां जिस दिन जांच होती है उस दिन सब समय पर पहुंचकर अपनी ईमानदारी का परिचय दे देते हैं। गौर करें तो ज्यादातर मरीजों को रीवा के लिए रेफर कर दिया जाता है। यहां पर पदस्थ चिकित्सा अक्सर पद और कुर्सी के लिए लड़ते देखे जाते हैं और इसी उठा पटक में अस्पताल का प्रबंध बिगड़ा हुआ है हालत तो यह है कि लोगों को प्राइवेट नर्सिंग होम में शरण लेनी पड़ती है। भीषण गर्मी में बच्चा वार्ड सहित अन्य वार्ड में केवल पंखे का ही सहारा रहता है जबकि कहने वाले कहते हैं कि पहले यहां एसी लगी हुई थी लेकिन गई कहां किसी को कुछ पता नहीं। यहां नेताओं और अधिकारियों की सक्रियता अगर बराबर बन जाए तो आम आदमी स्वास्थ्य सेवाओं के लाभ से लाभान्वित हो जाएगा।








