सीधी सरकारी अस्पताल के डॉक्टरों के दम पर निजी अस्पतालों का संचालन नॉर्मल डिलेवरी का पैकेज 18 से 22 हजार…
सीधी, सौ विस्तरीय अस्पताल की अनुमति लेकर 30 बेड के रूप में संचालित हो रहे शहर के लाइफ केयर हॉस्पिटल में मरीजों व उनके परिजनों के लिए सुविधाएं तो नाम मात्र की है, लेकिन ईलाज के पैकेज होश उड़ाने वाले हैं। अस्पताल के रिसेप्शन में ही बकायदा डिलेवरी के पैकेज की रेट सूची चस्पा की गई है। प्रवेश द्वारा से लगे 8 बाई 15 की गैलरी में अस्पताल प्रबंधन द्वारा रिसेप्शन बनाया गया है। दोनों तरफ मरीजों के बैठने की कुर्सियां लगाई मिली। आलम यह था कि दोनों तरफ पैर फैलाकर बैठने के विरोध करने बाद गैलरी से निकलने के लिए लोगों को पर्याप्त जगह नहीं बचती। सामने ही कैस काउंटर बनाया गया है, जिसके बाहर रेट सूची चस्पा है। इसमे नॉर्मल डिलेवरी का पैकेज 18 से 22 हजार, एलएससीएस केश का के अनुसार पैकेज 40 से 45 हजार तथा हिस्टेक्टॉमी का पैकेज 40 से 50 हजार रुपए दर्शाया गया है। यहां महिला रोग का डिपार्टमेंट जिला अस्पताल में पदस्थ महिला चिकित्सक संभालती है।
कलेक्ट्रेट मार्ग स्थिल लाइफ केयर हॉस्पिटल तथा हॉस्पिटल।जांच परीक्षण का शुल्क पैकेज के बाद भी दवाओं का भी चौंकाने वाला का अतिरिक्त भार
बतादें की सामान्य व सिजेरियन डिलेवरी में अस्पताल प्रबंधन द्वारा पैकेज की राशि तो निर्धारित है, लेकिन बाद में दवाओं का अतिरिक्त खर्च परिजनों पर लाद दिया जाता है। प्रसव उपरांत डिस्चार्ज हो रहे एक प्रसूता के परिजनों ने नाम न छापने की शर्त आपूण अस्पताल में जांच परीक्षण का शुल्क भी चौंकाने वाला ही है। गर्भधारण के बाद पहली बार जांच कराने आई खरबर निवासी पूनम सिंह ने बताया, चिकित्सक परामर्श शुल्क 300 रुपए लिया गया है। इसके बाद सोनोग्राफी के लिए दूसरे अस्पताल में भेजा गया, जहां एक हजार रुपये सोनोग्राफी का लिया गया। ब्लड जांच का पैकेज 1950 रुपए का रहा। जांच व परीक्षण में करीब पांच हजार रुपये खर्च हो चुके हैं। दवाएं लिखना है शेष है। महिला के अनुसार करीब 8 से 10 हजार रुपये प्रसव के बाद पहले परीक्षण में ही खर्च हो रहे हैं।
पार्किंग की सुविधा नहीं
लाइफ केयर हॉस्पिटल शहर के मुख्य मार्ग में शुमार कलेक्ट्रेट रोड में संचालित है। अस्पताल प्रबंधन के पास वाहनों की पार्किंग के लिए कोई सुविधा नहीं है। बताया गया कि भले ही सिजेरियन ऑपरेशन के लिए पैकेज निर्धारित है. लेकिन छुट्टी के दौरान जो दवाओं दी जाती हैं, उसे पैकेज से बाहर रखा गया है, वो दवाएं 3 से पांच हजार रुपये की होती हैं, जबकि शुरू में ऐसा कुछ नहीं बताया गया था। दिन भर सड़क पर वाहनों का जमावड़ा लागा रहता है और जाम की स्थिति निर्मित होती रहती है। इसके कारण आए दिन विवाद की स्थिति भी निर्मित होती रहती है। यदि सरकारी अस्पताल की बात करे तो ओपीडी काफी दिनों से बंद पड़ा है इधर निजी असपताल गरीबों की गाढ़ी कमाई का अपना फायदा उठा रहे है।








