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Sidhi24news; छात्रसंघ चुनाव का इंतजार, कब होगे चुनाव सूख रही राजनीति की प्राथमिक पाठशाला…

कॉलेज सबंधी मुद्दों पर दब रही आवाज, सात साल से नहीं हुए चुनाव, हर वर्ष विद्यार्थियों से इसी के नाम पर वसूली जा रही फीस

छात्रसंघ चुनाव का इंतजार, कब होगे चुनाव सूख रही राजनीति की प्राथमिक पाठशाला

सीधी राजनीति की प्राथमिक पाठशाला छात्रसंघ चुनाव की उम्मीद लंबे समय से सूख रही है। मध्यप्रदेश में विधानसभा एवं देश में लोकसभा चुनाव होने के बाद विद्यार्थियों को छात्रसंघ चुनाव का बेसब्री से इंतजार है। चुनाव न होने की वजह से विद्यार्थियों की आवाज दबकर रह जा रही है। कई मुद्दे ऐसे हैं जिनका शोर सरकार तक नहीं पहुंच पारहा। ऐसे में विद्यार्थियों के हित में फैसला नहीं हो पा रहा है।कारण है कि सरकार ने अभी तक छात्रसंघ चुनाव को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं की है। जबकि, वर्ष 2023 में मध्यप्रदेश में नई सरकार के गठन के हैरानी की बात यह है कि छात्रसंघ चुनाव के नाम पर हर सत्र में विद्यार्थियों से वनटाइम छात्रसंघ और

संजय गाँधी स्मृति महाविद्यालय का कमलनाथ सरकार में भी उठा था मुद्दा

मध्यप्रदेश में कई सालों से छात्र संघ चुनाव लगातार नहीं हो रहे हैं। वर्ष 2019 में कमलनाथ सरकार ने चुनाव कराने की बात कही थी, लेकिन मामला प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष प्रणाली के बीच में उलझ कर रह गया। इसके बाद दो साल कोरोना की वजह से चुनाव को लेकर कोई बात ही नहीं हुई।

छात्रसंघ चुनाव के लिए तैयार दोनों संगठन

सितंबर तक चुनाव की है उम्मीद

जिस तरह का कार्यक्रम जारी किया गया। है, उससे उम्मीद की जा रही है. कि सितंबर माह में छात्र संघ का चुनाव करवाया जाएगा, इससे पूर्व दो बार ज्ञापन सौंप चुका हूं, यदि फिर भी चुनाव नहीं करवाया जाता है तो विरोध तो नहीं कर सकता किंतु सरकार के समक्ष अपनी बात रखने के लिए ज्ञापन सौंपकर मांग करूंगा, चुनाव होना ही है।

चुनाव नहीं होगा तो घेरेंगे सीएम हाउस

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यायच खुद छात्र राजनीति से आगे आकर इस मुकाम पर पहुंचे हैं, उनके द्वारा उच्च शिक्षा मंत्री रहते हुए भी चुनाव का समर्थन किया गया था, एनएसयूआई के राष्ट्रीय व प्रदेश अध्यक्ष की अगुआई में सीएम हाउस का घेराव कर चुके हैं. अगर अब फिर समय से चुनाव नहीं करवाया जाता तो पूरी ताकत के साथ फिर से सीएम हाउस घेरा जाएगा।अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् एवं एनएसयूआइ दोनों ही छात्र संगठन भले ही अन्य मुद्दों पर एक दूसरे के विरोध में हों, लेकिन छात्रसंघ चुनाव के मुद्दे पर एक हैं। दोनों ही युवा इकाई के नेता चाहते हैं कि वह भी राजनीति में बेहतर मुकाम पाएं। छात्रसंघ चुनाव नहीं होने से उनका भविष्य भी अधर में लटक जाएगा।

समस्याओं की लिस्ट लंबी

कॉलेजों में विद्यार्थियों के दाखिले,छात्रवृत्ति, परीक्षा एवं परिणाम, पेयजल व्यवस्था, अध्यापन व्यवस्था, लाइबेरी सहित अन्य कई समस्या रहती है। दिन प्रतिदिन विद्यार्थियों की समस्याओं की लिस्ट लंबी होती जा रही है। आए दिन विद्यार्थी कभी संजय गांधी तो कभी कॉलेजों की कार्यप्रणाली से परेशान हो रहे हैं। छात्रों को प्रतिनिधि की जरूरत है। डॉ. मोहन यादव के मुख्यमंत्री बनने से विद्यार्थियों में नई आस जगी हुई है। उनका मानना है कि वे जल्द ही छात्रसंघ चुनाव को लेकर निर्णय लेंगे। मई माह में उच्च शिक्षा विभाग द्वारा कॉलेजों के लिए जारी किए गए शैक्षणिक कैलेंडर में छात्रसंघ चुनाव का भी जिक्र किया गया है। हालांकि चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से होंगे या फिर अप्रत्यक्ष प्रणाली से इसको लेकर अभी असमंजस की ही स्थिति है।

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