लोकायुक्त की नई पहल – शिकायतकर्ता को रिश्वत की राशि अब जल्द मिलेगी वापस!
भोपाल: भ्रष्टाचार के खिलाफ मध्यप्रदेश सरकार ने एक नई और महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत की है। लोकायुक्त विभाग ने शिकायतकर्ताओं को रिश्वत में दी गई राशि जल्दी वापस लौटाने की व्यवस्था बनाने की तैयारी कर ली है। यह कदम ऐसे मामलों में राहत देने के लिए उठाया गया है, जिनमें शिकायतकर्ता को अदालत के फैसले का इंतजार करते-करते कई सालों तक अपनी राशि फंसी हुई रहती है।
विशेष निधि बनाने का प्रस्ताव
लोकायुक्त पुलिस के अधिकारी जयदीप प्रसाद ने बताया कि सरकार ने इस बारे में एक विशेष निधि (fund) बनाने का प्रस्ताव भेजा है, जिसके तहत शिकायतकर्ता को ट्रैप में दी गई रिश्वत राशि का तत्काल भुगतान किया जाएगा। बाद में, जब कोर्ट से मामले का निपटारा होगा, तो वह राशि विशेष निधि में वापस चली जाएगी। इस प्रणाली से राशि का ‘रोटेशन’ (आना-जाना) बना रहेगा और शिकायतकर्ता को उनकी राशि शीघ्र लौटाई जा सकेगी।
अब तक की स्थिति
अभी तक, रिश्वत के मामलों में शिकायतकर्ता को अपनी राशि का भुगतान केवल कोर्ट के फैसले के बाद ही मिल पाता था, और यह प्रक्रिया कई सालों तक खिंच सकती थी। इसके अलावा, इस राशि पर न तो कोई ब्याज मिलता था और न ही इसका कोई अन्य उपयोग किया जा सकता था, क्योंकि यह राशि अदालत के अधीन रहती थी।
शुरुआत में 40 लाख रुपये का फंड
इस नई व्यवस्था के तहत, शुरुआत में लगभग 40 लाख रुपये का फंड तैयार किया जाएगा। यह निधि लोकायुक्त पुलिस के मामले में लागू की जाएगी, क्योंकि राज्य में सबसे अधिक रिश्वत के मामले लोकायुक्त के द्वारा पकड़े जाते हैं। भविष्य में, आर्थिक अपराध विंग (ईओडब्ल्यू) में भी इस तरह की व्यवस्था लागू की जा सकती है।
रिश्वत के मामलों में बढ़ेगा विश्वास
यह कदम भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई को और मजबूती देगा। सरकार का मानना है कि इससे रिश्वत के मामलों में लोगों का विश्वास बढ़ेगा और शिकायतकर्ता अधिक सक्रिय रूप से भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने के लिए प्रेरित होंगे। हर साल लगभग 500 से 700 सरकारी अधिकारी-कर्मचारी रिश्वत लेते हुए पकड़े जाते हैं, और शिकायतकर्ताओं को उनका पैसा जल्दी मिल जाने से वे इस प्रक्रिया में अधिक सहयोग करेंगे।
लोकायुक्त के इस कदम से मिलने वाली राहत
इस नई व्यवस्था से शिकायतकर्ताओं को सिर्फ अपनी राशि वापस मिलने की राहत नहीं होगी, बल्कि वे इस प्रक्रिया में अधिक विश्वास के साथ जुड़ पाएंगे। इसके अलावा, लोकायुक्त विभाग को भी रिश्वतखोरों को पकड़ने में और अधिक सफलता मिल सकती है।
सीबीआई में भी नहीं है यह व्यवस्था
उल्लेखनीय है कि सीबीआई जैसी केंद्रीय एजेंसियों में भी अभी तक इस तरह की कोई व्यवस्था नहीं है, जहां शिकायतकर्ताओं को तुरंत उनकी राशि लौटाई जाती हो। यही कारण है कि इस पहल को लेकर राज्य सरकार और लोकायुक्त विभाग को काफी सराहना मिल रही है।
यह पहल मध्यप्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक मजबूत कदम साबित हो सकती है। सरकार की कोशिश है कि वह रिश्वतखोरी के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए लोगों को अधिक उत्साहित करे और शिकायतकर्ताओं को न्याय दिलाने की प्रक्रिया को सरल और तेज बनाए।








