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शासकीय हाई स्कूल चिलरी कला में शिक्षकों की लापरवाही से छात्रों की पढ़ाई चौपट, अभिभावकों में आक्रोश

शासकीय हाई स्कूल चिलरी कला में शिक्षकों की लापरवाही से छात्रों की पढ़ाई चौपट, अभिभावकों में आक्रोश

सीधी
जिले के शासकीय हाई स्कूल चिलरी कला (संकुल केंद्र धुम्मा) में शिक्षकों की अनुशासनहीनता और लापरवाही के कारण छात्रों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। विशेष रूप से 10वीं के बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए यह स्थिति चिंताजनक है।

शिक्षकों का गैरजिम्मेदाराना रवैया
अभिभावकों का आरोप है कि शासकीय शिक्षक राजेन्द्र मिश्रा और अतिथि महिला शिक्षक स्कूल में पढ़ाई कराने की बजाय गप्पबाजी में समय बिताते हैं। आपको बता दें यह शासकीय शिक्षक चिलरी कला के ही पुस्तैनी निवासी हैं जो 1-2 घंटे के लिए आते हैं फिर अपने घर चले जाते हैं। ग्रामीण जन जब इसका विरोध करते हैं या पढ़ाने का अनुरोध हैं तो उनका कहना है बच्चे पढ़ें या न पढ़ें, हमारे पढ़ाये कलेक्टर न बनेंगे।

– समय पर न आना:
अतिथि शिक्षक 12 बजे के बाद स्कूल आते हैं और 3 बजे से पहले ही चले जाते हैं।

-आदेशों का पालन न करना:
प्राचार्य द्वारा दिए गए निर्देशों को महिला अतिथि शिक्षक मानने से इंकार करती हैं।

– गंभीर लापरवाही:
पढ़ाई से संबंधित किसी भी गतिविधि में शिक्षकों की रुचि नहीं है, जिससे छात्रों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है।

प्राचार्य को धमकियां
प्राचार्य ने बताया कि शिक्षकों की अनुशासनहीनता की शिकायत करने पर उन्हें सांसद सीधी के नाम पर हटवाने और सस्पेंड कराने की धमकियां दी जाती हैं।

जातिवाद के शिकार हैं छात्र
शासकीय शिक्षक राजेन्द्र प्रसाद मिश्रा द्वारा विद्यालय परिसर में जातिवाद का झंडा गाड़ दिए हैं क्योंकि वहां 80% से अधिक छात्र अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ा वर्ग के हैं। छात्रों को राधे-राधे, पाय लागू पंडित जी और सुबह सुबह अपना पैर पढ़वाने का तरीका सिखा दिया है। ग्रामीणों द्वारा विरोध किये जाने पर छात्रों को फेल कर देने को बोलते हैं।

छात्रों का भविष्य दांव पर
शिक्षा विभाग द्वारा 10वीं के छात्रों के लिए बेहतर परिणाम सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसके बावजूद यहां की स्थिति चिंताजनक है।
– पढ़ाई के अभाव में छात्रों का शैक्षणिक स्तर गिर रहा है।
– बोर्ड परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद कम होती जा रही है।

अभिभावकों की शिकायत और आक्रोश
अभिभावकों का कहना है कि शिक्षकों के इस गैरजिम्मेदाराना रवैये ने बच्चों के भविष्य को खतरे में डाल दिया है। कई बार शिक्षकों को सुधारने की अपील की गई, लेकिन कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला।

तत्काल कार्रवाई की मांग
अभिभावकों ने शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन से मामले में तुरंत हस्तक्षेप कर शिक्षकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है।
– समय पर शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित की जाए।
– अनुशासनहीन शिक्षकों को तत्काल हटाया जाए।
– स्कूल में पढ़ाई का माहौल सुधारने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं।

प्रशासन का हस्तक्षेप जरूरी
इस मामले को लेकर छात्रों, अभिभावकों और प्राचार्य का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। जिला प्रशासन को तत्काल जांच कर कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि छात्रों का शैक्षणिक भविष्य सुरक्षित किया जा सके।

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