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कुसमी जनपद पंचायत: अधिकारियों के इंतजार में खाली कुर्सियां, हितग्राही हुए हताश

कुसमी जनपद पंचायत: अधिकारियों के इंतजार में खाली कुर्सियां, हितग्राही हुए हताश

सीधी, 24 दिसंबर 2024

मध्यप्रदेश के कुसमी जनपद पंचायत कार्यालय में अधिकारियों और कर्मचारियों की गैरमौजूदगी ने एक बार फिर शासन के कामकाज पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मंगलवार को वर्किंग डे होने के बावजूद कार्यालय की कुर्सियां खाली रहीं। अपने काम के लिए आए दर्जनों हितग्राही घंटों इंतजार के बाद निराश लौट गए।

मीडिया की पड़ताल में उजागर हुआ सच

मीडिया को सूचना मिलने पर जब टीम मंगलवार दोपहर 12 बजे जनपद पंचायत कार्यालय पहुंची, तो वहां का नजारा हैरान करने वाला था।

  • दर्जनभर कर्मचारियों की कुर्सियां खाली थीं।
  • कई कमरों के दरवाजे तक नहीं खुले थे।
  • केवल ऑपरेटर गुलाबनबी, रामसुख यादव, विनीत राठिया, भृत्य पवन सिंह, और लालबहादुर जैसे कुछ ही कर्मचारी मौजूद थे।

मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) ज्ञानेन्द्र मिश्रा एक विशेष बैठक के लिए सीधी गए हुए थे, लेकिन अन्य कर्मचारियों की गैरहाजिरी के कारण कार्यालय में कोई कामकाज नहीं हो सका।

हितग्राही परेशान, योजनाएं अटकीं

गांवों से आए हितग्राही अपने कार्य के लिए कई किलोमीटर का सफर तय करके पहुंचे थे।

  • अधिकांश ने खाली कार्यालय देखकर निराशा जताई।
  • ग्राम पंचायतों के सचिव और जीआरएस (ग्राम रोजगार सहायक) भी अपने अधूरे कार्य के साथ वापस लौट गए।
  • कई लोगों ने कहा कि योजनाओं के तहत मिलने वाले लाभ में लगातार देरी हो रही है, और कर्मचारियों की लापरवाही इसका मुख्य कारण है।

सीईओ ने दी सफाई, कार्रवाई का आश्वासन

मीडिया द्वारा संपर्क किए जाने पर सीईओ ज्ञानेन्द्र मिश्रा ने कहा:

“कर्मचारियों के अनुपस्थित होने की सूचना और फोटो मुझे भेजे गए हैं। सभी अनुपस्थित कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा और सख्त कार्रवाई की जाएगी।”

जनहित की योजनाओं पर असर

यह घटना आदिवासी बहुल क्षेत्र में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में हो रही लापरवाही को उजागर करती है।

  • जनपद पंचायत जैसे महत्वपूर्ण कार्यालय में इस तरह की लापरवाही से जनता तक शासन की योजनाएं सही समय पर नहीं पहुंच पा रही हैं।
  • यह स्थिति उन जरूरतमंदों के लिए और अधिक कठिनाई पैदा करती है, जो सरकारी सहायता पर निर्भर हैं।

स्थानीय जनता की नाराजगी

हितग्राहियों ने कर्मचारियों की गैरमौजूदगी पर कड़ी नाराजगी जताई। उनका कहना है कि,

“सरकार योजनाओं के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन अधिकारियों और कर्मचारियों की इस लापरवाही के कारण हमें बार-बार परेशान होना पड़ता है।”

समाधान की मांग

जनता और हितग्राहियों ने मांग की है कि:

  1. कार्यालयों की नियमित जांच हो।
  2. कर्मचारियों की उपस्थिति सुनिश्चित की जाए।
  3. लापरवाह अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।

इस घटना ने प्रशासन की कार्यशैली और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में मौजूद खामियों को उजागर कर दिया है। अब देखना होगा कि शासन इस पर क्या कदम उठाता है और क्या जनता को इन समस्याओं से राहत मिल पाएगी।

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