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सीधी:आखिर क्यों बंद हो गई ओवरलोड वाहनों पर कार्रवाई?

सीधी:आखिर क्यों बंद हो गई ओवरलोड वाहनों पर कार्रवाई?

सीधी, 29 दिसंबर 2024:
रेत और खनिज परिवहन में ओवरलोड वाहनों पर कार्यवाही का सिलसिला अचानक थम गया है। सीधी जिले में दो दिनों तक सख्ती के साथ 41 ओवरलोड वाहनों पर कार्रवाई हुई, लेकिन उसके बाद प्रशासन की सक्रियता पूरी तरह से ठप हो गई। सवाल उठ रहा है कि क्या यह प्रशासनिक उदासीनता है या किसी दबाव का परिणाम?

कार्यवाही के शुरुआती कदम

कुछ समय पहले जिला कलेक्टर और खनिज विभाग के अधिकारियों ने मीडिया की खबरों के बाद ओवरलोड वाहनों के खिलाफ अभियान चलाया था। दो दिनों के भीतर:

  • 41 ओवरलोड वाहन पकड़े गए।
  • इन वाहनों पर जुर्माना लगाकर उन्हें खनिज अधिनियम के तहत कार्रवाई के लिए कलेक्टर कार्यालय भेजा गया।
  • अधिकतर वाहन सिंगरौली, शहडोल, और हरचोका की रेत खदानों से संबंधित थे।

कार्यवाही का रुकना और सवाल

प्रारंभिक सक्रियता के बाद अचानक कार्रवाई बंद होने से यह सवाल उठ रहे हैं:

  1. प्रशासनिक दबाव: क्या रेत माफिया के प्रभाव और दबाव में आकर यह कार्रवाई बंद हुई है?
  2. लापरवाही: क्या अधिकारियों ने अपने दायित्वों से किनारा कर लिया है?
  3. अधूरी योजना: क्या ओवरलोडिंग रोकने के लिए कोई दीर्घकालिक योजना नहीं बनाई गई थी?

जमीनी हालात बदतर

रेत खदानों से निकलने वाले ओवरलोड वाहन न केवल सड़कों को खराब कर रहे हैं, बल्कि यातायात के लिए भी गंभीर खतरा बन गए हैं।

  • सड़कों की स्थिति: कुसमी क्षेत्र की सड़कों पर वाहनों का अत्यधिक भार इन सड़कों को बर्बाद कर चुका है।
  • गोतरा देवी मंदिर मार्ग: श्रद्धालु और स्थानीय निवासी धूल और गड्ढों से परेशान हैं।
  • गोपद पुल: पुल का एक पाया टूटने के बाद भी भारी वाहन उस पर से गुजर रहे हैं, जिससे पुल के टूटने का खतरा बढ़ गया है।

स्थानीय निवासियों का गुस्सा

स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन ने शुरुआत में जो कार्रवाई की थी, वह केवल दिखावा थी। अब रेत माफिया के कारण ओवरलोडिंग फिर शुरू हो गई है। गोतरा पंचायत के पदाधिकारियों ने कई बार प्रशासन को सूचित किया, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

आगे की जरूरत

  • सख्त निगरानी: खनिज विभाग और पुलिस को नियमित रूप से चेकिंग करनी चाहिए।
  • स्थायी समाधान: रेत खदानों से निकलने वाले वाहनों के लिए वैकल्पिक मार्ग बनाया जाए।
  • सड़कों की मरम्मत: क्षतिग्रस्त सड़कों की तत्काल मरम्मत की जाए।

यदि प्रशासन समय रहते ओवरलोड वाहनों पर नियंत्रण नहीं करता, तो जिले की सड़कों और पुलों की हालत और खराब हो सकती है। साथ ही, आम जनता को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।

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