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सीधी:क्षतिग्रस्त गोपद पुल और टूटती सड़क की दुर्दशा पर 26 जनवरी को होगा आंदोलन

सीधी:क्षतिग्रस्त गोपद पुल और टूटती सड़क की दुर्दशा पर 26 जनवरी को होगा आंदोलन

सीधी, 30 दिसंबर 2024:
सीधी जिले के आदिवासी क्षेत्र कुसमी में बढ़ते भ्रष्टाचार और प्रशासनिक उदासीनता के कारण क्षेत्र की मूलभूत संरचनाएं जैसे सड़कें और पुल गंभीर क्षति का शिकार हो रही हैं। गोपद नदी पर बने पुल की जर्जर स्थिति और ओवरलोड वाहनों के कारण टूटती सड़कों ने स्थानीय लोगों की परेशानियां बढ़ा दी हैं। इन समस्याओं को लेकर समाजसेवियों ने 26 जनवरी 2025 को बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है।

भारी वाहनों से हो रहा नुकसान

कुसमी क्षेत्र में रेत से लदे ओवरलोड वाहन, जो आठ टन से अधिक वजन लेकर चलते हैं, प्रशासनिक प्रतिबंध के बावजूद गोपद पुल और सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इन वाहनों की वजह से गोपद पुल का एक पावा क्षतिग्रस्त हो चुका है और पुल टूटने की कगार पर है।
स्थानीय समाजसेवी और निवासियों का कहना है कि यह स्थिति बड़े हादसे को निमंत्रण दे रही है, लेकिन प्रशासन कोई स्थायी समाधान निकालने में विफल रहा है।

प्रशासनिक कार्रवाई और उसकी सीमाएं

हाल ही में जिला कलेक्टर के आदेश पर खनिज विभाग और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम ने 42 ओवरलोड वाहनों पर कार्रवाई की थी। हालांकि, यह कार्रवाई अल्पकालिक रही और स्थिति दोबारा वैसी ही हो गई। समाजसेवियों का आरोप है कि प्रशासन की आंख तब ही खुलती है जब मीडिया इन मुद्दों को उजागर करता है।

समाजसेवियों का आंदोलन

स्थानीय समाजसेवी आनंद सिंह ददुआ ने प्रशासन की लापरवाही पर रोष व्यक्त करते हुए कहा,
“हम लंबे समय से इन समस्याओं को लेकर आवाज उठा रहे हैं, लेकिन प्रशासन सुनने को तैयार नहीं है। अब मजबूर होकर 26 जनवरी को एक विशाल धरना प्रदर्शन करेंगे और सड़क को पूरी तरह जाम करेंगे।”

उन्होंने आगे कहा कि यदि प्रशासन समय रहते कार्रवाई नहीं करता है, तो यह आंदोलन और भी बड़ा रूप लेगा।

भ्रष्टाचार का आलम और रेल आंदोलन की सफलता

इससे पहले कुसमी क्षेत्र में रेल सेवाओं से जुड़ी समस्याओं को लेकर समाजसेवियों ने “रेल रोको आंदोलन” किया था। उस आंदोलन के बाद प्रशासन ने उनकी मांगों पर ध्यान दिया और समाधान के लिए कदम उठाए। समाजसेवी इस सफलता के बाद अब सड़क और पुल की समस्या को लेकर संघर्षरत हैं।

स्थानीय लोगों की चिंता

क्षेत्र के लोग गोपद पुल की जर्जर स्थिति से डरे हुए हैं। उनका कहना है कि पुल के क्षतिग्रस्त होने से न केवल यातायात बाधित होगा, बल्कि एक बड़ा हादसा भी हो सकता है। सड़कों की खराब स्थिति से लोगों की आवाजाही और जीवनस्तर भी प्रभावित हो रहा है।

प्रशासन का मौन

स्थानीय निवासियों और समाजसेवियों का आरोप है कि प्रशासन बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है। जब तक हादसा नहीं होता, तब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे।

निष्कर्ष

कुसमी क्षेत्र के गोपद पुल और सड़कों की समस्या प्रशासन की उदासीनता को उजागर करती है। समाजसेवियों द्वारा आंदोलन की घोषणा प्रशासन के लिए एक चेतावनी है। यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो न केवल आंदोलन बड़ा रूप ले सकता है, बल्कि यह समस्या क्षेत्र के विकास में बड़ी बाधा बन सकती है।

समाजसेवी आनंद सिंह ददुआ का बयान:
“हमने प्रशासन को पर्याप्त समय दिया है। अगर हमारी मांगें नहीं मानी जातीं, तो 26 जनवरी को हम सड़क पर उतरेंगे और बड़ा आंदोलन करेंगे।”

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