हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: आरटीआई के तहत लोकसेवकों के वेतन की जानकारी देना अनिवार्य
जबलपुर, 1जनवरी 2025
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने सूचना का अधिकार अधिनियम (आरटीआई) के तहत लोकसेवकों के वेतन संबंधी जानकारी को अनिवार्य करार देते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि गोपनीयता का तर्क देकर वेतन की जानकारी देने से इंकार करना सूचना के अधिकार अधिनियम के उद्देश्यों के विपरीत है।
पारदर्शिता को मजबूत करने का प्रयास
न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल की एकलपीठ ने छिंदवाड़ा निवासी याचिकाकर्ता एम.एम. शर्मा द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया।
याचिकाकर्ता ने छिंदवाड़ा वन परिक्षेत्र के दो कर्मचारियों के वेतन की जानकारी मांगी थी, जिसे लोक सूचना अधिकारी ने गोपनीय बताते हुए देने से इंकार कर दिया था।
पूर्व आदेश निरस्त
हाई कोर्ट ने इस मामले में सूचना आयोग और लोक सूचना अधिकारी द्वारा जारी किए गए आदेशों को निरस्त करते हुए, याचिकाकर्ता को एक महीने के भीतर मांगी गई जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।
गोपनीयता के तर्क को खारिज किया
कोर्ट ने कहा कि लोकसेवकों के वेतन संबंधी जानकारी सार्वजनिक महत्व की है और इसे गोपनीय नहीं माना जा सकता। सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा-4 के तहत इसे साझा करना अनिवार्य है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि धारा 8(1)(जे) के तहत इस जानकारी को तृतीय पक्ष या व्यक्तिगत सूचना बताकर छिपाना अधिनियम के पारदर्शिता के सिद्धांतों के खिलाफ है।
प्रभाव और महत्व
इस निर्णय से लोकसेवकों के वेतन, भत्तों और अन्य वित्तीय विवरणों को पारदर्शिता के तहत उपलब्ध कराने का मार्ग प्रशस्त होगा। यह फैसला नागरिकों को सरकारी तंत्र में अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रेरित करेगा।








