संजय टाइगर रिजर्व में बाघिन की रहस्यमयी मौत

सिंगरौली: संजय टाइगर रिजर्व से सिंगरौली तक लंबा सफर तय करने वाली एक बाघिन की सोमवार रात संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। बाघिन का शव सिंगरौली जिले के माडा वन परिक्षेत्र के रौदी गांव में मिला, जहां पिछले तीन दिनों से उसकी कोई गतिविधि नहीं देखी गई थी।
बाघिन की यात्रा और संदिग्ध परिस्थितियां
मुख्य वन संरक्षक अमित दुबे के अनुसार, यह बाघिन छत्तीसगढ़ से आई थी और पहले अमरकंटक के जंगलों में पहुंची। वहां से उसे 7 जनवरी को संजय टाइगर रिजर्व (सीधी) में छोड़ा गया था। लेकिन इसके बाद वह लगातार भ्रमण करती रही और 5 फरवरी को सिंगरौली के माडा परिक्षेत्र में पहुंच गई।
वन विभाग की टीम लगातार उसकी निगरानी कर रही थी और ग्रामीणों को जंगल की ओर न जाने की चेतावनी दी गई थी। हालांकि, तीन दिनों तक कोई हलचल न देखने के बाद जब वन विभाग की टीम ने उसकी तलाश की, तो बाघिन मृत पाई गई।
मौत के कारणों की जांच जारी
प्राथमिक जांच में बाघिन के शरीर पर कोई चोट के निशान नहीं मिले हैं, जिससे मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सका है। वन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि संभावना है कि बाघिन वापस छत्तीसगढ़ लौटना चाह रही थी, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद मौत के सही कारणों का पता चलेगा। वन विभाग ने बाघिन के शव का पोस्टमॉर्टम कराकर अंतिम संस्कार की तैयारी कर ली है। वहीं, मामले की विस्तृत जांच के आदेश भी जारी किए गए हैं।
वन विभाग की अपील
वन विभाग ने आसपास के ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी है और आवासीय इलाकों में अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा, यह भी जांच की जा रही है कि बाघिन की मौत स्वाभाविक थी या फिर इसमें किसी बाहरी कारक की भूमिका रही।
संजय टाइगर रिजर्व और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञ इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं, क्योंकि हाल के वर्षों में मध्य प्रदेश में बाघों की असमय मौत के कई मामले सामने आए हैं।









