पुलिस अधिकारियों के घर ही सुरक्षित नहीं, चोरों की ‘ड्यूटी’ पर सवाल उठाना नादानी!
शहडोल से रिपोर्ट:
शहर में अब चोर इतने पेशेवर हो चुके हैं कि उन्होंने पुलिस अधिकारियों के घरों को भी ‘प्रशिक्षण स्थल’ मान लिया है। दो दिनों में दो पुलिस अधिकारियों के घरों में हुई चोरी ने न सिर्फ पुलिस को शर्मिंदा किया है, बल्कि चोरों के ‘कॉन्फिडेंस लेवल’ को भी आसमान पर पहुंचा दिया है।
16 अप्रैल को ट्रैफिक निरीक्षक शिवेंद्र भगत जब आराम से रीवा की यात्रा पर गए हुए थे, तो चोरों ने उनके सरकारी आवास पर “सर्वे” कर डाला। मोबाइल और नकदी उड़ा ले गए। ऐसा नहीं कि चोरों को कोई गिल्ट हो, बल्कि उन्होंने तो चाबी भी वहीं टेबल के नीचे से ही उठा ली—संवेदनशीलता की पराकाष्ठा!
एक दिन पहले 15 अप्रैल को डीएसबी के योगेंद्र सिंह के घर भी चोर ‘क्लास’ लेकर गए थे। लैपटॉप और घड़ी ले गए, जाते-जाते खिड़की तोड़ने का प्रमाण भी छोड़ गए। दरअसल, ऐसा प्रतीत होता है कि चोरों का यह “हाउसिंग वीक” चल रहा है—जिसमें वे सरकारी आवासों की गुणवत्ता और सुरक्षा को परख रहे हैं।
अब सवाल यह है कि जब पुलिस अधिकारियों के घरों पर CCTV नहीं है, तो जनता CCTV को सुरक्षा का विकल्प कैसे माने? यह एक ऐसा गूढ़ प्रश्न है जिस पर केवल सरकार ही नहीं, भगवान भी चिंतन कर रहे होंगे।
एडिशनल एसपी अभिषेक दीवान जी ने पूरी गंभीरता से कहा कि “जांच शुरू हो चुकी है।” चोरों को पकड़ने की कोशिशें तेज हैं, हालांकि चोर इन दिनों शायद छुट्टी पर हों या अगली बड़ी चोरी की तैयारी में व्यस्त हों।
इन वारदातों के बाद जनता को यह सोचने पर मजबूर होना पड़ा है कि अगर पुलिस अपने घर की सुरक्षा नहीं कर पा रही, तो आम आदमी की चौखट पर ताला लगाना भी अब प्रतीकात्मक कार्य हो चला है।
अंत में बस यही कहा जा सकता है—अब चोरों को हथकड़ी नहीं, शायद प्रमोशन की जरूरत है!








