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संजय टाइगर रिजर्व में करंट से बाघ की मौत, वन अपराध दर्ज – जांच में जुटा वन विभाग

संजय टाइगर रिजर्व में करंट से बाघ की मौत, वन अपराध दर्ज – जांच में जुटा वन विभाग

सीधी, 19 अगस्त 2025।
सीधी जिले के संजय टाइगर रिजर्व से एक दुखद घटना सामने आई है। दुबरी परिक्षेत्र के खरबर बीट में मंगलवार की रात करीब 12:05 बजे एक वयस्क नर बाघ मृत पाया गया। क्षेत्र संचालक संजय टाइगर रिजर्व अमित कुमार दुबे ने इसकी पुष्टि की है। मृत बाघ की पहचान टी-43 के रूप में हुई है।

कैसे हुई घटना

वन विभाग की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि ग्रामीणों द्वारा खेतों को जंगली जानवरों से बचाने के लिए लगाए गए बिजली के तार की चपेट में आने से बाघ की मौत हुई। यह घटना दुबरी परिक्षेत्र के डेवा वृत्त की खरबर बीट (कक्ष क्रमांक 509) में घटी। सूचना मिलते ही स्थानीय वनकर्मचारी और अधिकारी मौके पर पहुंचे और तुरंत उच्चाधिकारियों को सूचित किया।

पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक जांच

मौके पर पहुंचे तीन डॉक्टरों के दल ने मृत बाघ का पोस्टमार्टम किया। जांच के दौरान बाघ के सभी अंग सुरक्षित पाए गए। हालांकि, मृत्यु के कारणों की पुष्टि के लिए विसरा नमूना एकत्र कर अग्रिम फॉरेंसिक जांच हेतु भेजा गया है।

प्रोटोकॉल के तहत अंतिम संस्कार

राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए बाघ के शव को नष्ट करने की कार्रवाई की गई। इस दौरान क्षेत्र संचालक अमित कुमार दुबे, एनटीसीए के प्रतिनिधि कैलाश तिवारी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बाघ के शव को प्रोटोकॉल के मुताबिक जलाकर नष्ट किया गया।

वन अपराध प्रकरण दर्ज

वन विभाग ने इस मामले को गंभीर मानते हुए वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत वन अपराध प्रकरण क्रमांक 562/18 दिनांक 19.08.2025 दर्ज कर लिया है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि मामले की विवेचना की जा रही है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

बाघ संरक्षण को लेकर चिंता

यह घटना न केवल वन विभाग के लिए बल्कि क्षेत्र के वन्यजीव संरक्षण प्रयासों के लिए भी गंभीर चिंता का विषय है। विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में फसल बचाने के लिए अवैध रूप से लगाए जाने वाले बिजली के तार न केवल बाघों बल्कि अन्य वन्यजीवों के लिए भी घातक साबित हो रहे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि बाघ की मौत ने उन्हें भी विचलित कर दिया है। ऐसे हादसों को रोकने के लिए सरकार और वन विभाग को ठोस कदम उठाने होंगे, ताकि मनुष्य-वन्यजीव संघर्ष को कम किया जा सके और बाघों जैसे दुर्लभ प्राणियों की रक्षा सुनिश्चित हो सके।

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