पन्ना टाइगर रिजर्व के बफर जोन में तेंदुए का आतंक: 10 साल के मासूम को घसीटकर ले गया, पेड़ पर कर दी निर्मम हत्या

पन्ना (मध्य प्रदेश)।
मध्य प्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व (पीटीआर) के बफर जोन में जंगली जानवरों का खतरा एक बार फिर भयावह रूप में सामने आया है। जारधोबा गांव में गुरुवार रात एक तेंदुए ने 10 वर्षीय मासूम बच्चे पर हमला कर उसकी निर्मम हत्या कर दी। तेंदुआ बच्चे को घसीटते हुए पास के जंगल में ले गया और पेड़ पर चढ़ाकर उसका सिर धड़ से अलग कर दिया। इस दर्दनाक घटना से पूरे इलाके में दहशत और आक्रोश का माहौल है।
खेत से झोपड़ी जाते समय हुआ हमला

मृतक बच्चे की पहचान शिब्बू आदिवासी के रूप में हुई है, जो कक्षा दूसरी का छात्र था। घटना के समय शिब्बू के माता-पिता खेत पर फसल की रखवाली कर रहे थे। शिब्बू को पास ही खेत से करीब 200 मीटर दूर बनी झोपड़ी में रह रहे दादा-दादी को आटा देने भेजा गया था।
परिजन के अनुसार, शाम करीब 6 बजे शिब्बू झोपड़ी से वापस लौट रहा था, तभी रास्ते में घात लगाए बैठे तेंदुए ने उस पर अचानक हमला कर दिया।
रातभर चलता रहा भ्रम, सुबह मिली दिल दहला देने वाली सच्चाई
घटना की सबसे दुखद बात यह रही कि माता-पिता को लगा बच्चा दादा-दादी के पास है, वहीं दादा-दादी को लगा बच्चा माता-पिता के पास चला गया है। इसी भ्रम में पूरा परिवार रातभर सो गया।
जब शुक्रवार सुबह शिब्बू कहीं नजर नहीं आया, तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। खोज के दौरान खेत के पास एक पेड़ के नीचे बच्चे का क्षत-विक्षत शव और सिर अलग अवस्था में मिला, जिसे देखकर पूरे गांव में कोहराम मच गया।
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वन विभाग और पुलिस मौके पर पहुंची

घटना की सूचना मिलते ही पन्ना टाइगर रिजर्व की टीम, वन विभाग और पुलिस प्रशासन मौके पर पहुंचा। क्षेत्र को घेराबंदी कर जांच शुरू की गई।
एसपी निवेदिता नायडू ने बताया कि तेंदुआ बच्चे को घसीटकर ले गया था, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है।
ग्रामीणों में डर, वन विभाग पर उठे सवाल
इस घटना के बाद जारधोबा गांव सहित आसपास के इलाकों में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि यह पहली घटना नहीं है, इससे पहले भी बफर जोन में जंगली जानवरों की आवाजाही और हमलों की घटनाएं हो चुकी हैं।
ग्रामीणों ने वन विभाग की गश्त, सुरक्षा व्यवस्था और चेतावनी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते सुरक्षा इंतजाम किए गए होते तो एक मासूम की जान बचाई जा सकती थी।
चार भाई-बहनों में दूसरे नंबर का था शिब्बू
शिब्बू के पिता बहादुर आदिवासी बटाई पर खेत लेकर खेती करते हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से ही कमजोर है। शिब्बू चार भाई-बहनों में दूसरे नंबर का बेटा था।
शासकीय प्राथमिक शाला कलारन टोला जारधोबा के प्राचार्य दुर्जन सिंह ने बताया कि स्कूल रिकॉर्ड में बच्चे का नाम देव आदिवासी दर्ज था। वह पढ़ाई में सामान्य था और नियमित रूप से स्कूल आता था।
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बफर जोन में बढ़ता खतरा, प्रशासन के लिए चेतावनी
यह घटना एक बार फिर टाइगर रिजर्व के बफर जोन में रह रहे ग्रामीणों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। वन्यजीव संरक्षण और मानव सुरक्षा के बीच संतुलन न बनने की कीमत मासूमों की जान से चुकानी पड़ रही है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि तेंदुए को जल्द से जल्द पकड़कर सुरक्षित स्थान पर छोड़ा जाए, क्षेत्र में स्थायी गश्त, रात में रोशनी की व्यवस्था, और ग्रामीणों को मुआवजा दिया जाए।
मासूम की मौत ने झकझोरा
पन्ना टाइगर रिजर्व के बफर क्षेत्र में हुई यह घटना न सिर्फ एक परिवार के लिए, बल्कि पूरे समाज के लिए झकझोर देने वाली है। सवाल यह है कि कब तक ग्रामीण जंगली जानवरों के डर में जीते रहेंगे, और कब प्रशासन ठोस कदम उठाएगा।
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