Sidhi 24news;सदस्यता अभियान,रीवा के माननीयों की हालत दयनीय टारगेट को लेकर भाजपा हाई कमान ने जताई नाराजगी, बढ़ा ब्लड प्रेशर
टारगेट से कोसों दूर, लगी फटकार जागरण,
रीवा सत्तारूढ़ दल भाजपा का प्रदेश के साथ ही रीवा जिले में सदस्यता अभियान चल रहा है। साढ़े 18 लाख वोटर वाले रीवा संसदीय क्षेत्र को 8 लाख सदस्य बनाने का टारगेट मिला है। बताया यह जा रहा है कि अभी तक रीवा संसदीय क्षेत्र में सदस्यता का प्रतिशत 15 फीसदी से अधिक नहीं हो पाया है, जबकि आखिरी तिथि 25 सितंबर है। पार्टी सूत्रों की मानें तो रीवा संसदीय क्षेत्र में सदस्यता का आंकड़ा दो लाख के भीतर है। महज एक सप्ताह में 6 लाख से अधिक की सदस्यता पूरी करना दूर की कौड़ी नजर आ रही है। विडंबना इस बात की है कि रीवा संसदीय क्षेत्र के 7 विधायक भाजपा के हैं, साथ ही सांसद भी भाजपा से हैं। बावजूद इसके भाजपा की सदस्यता प्रदेश के 55 जिले में से 37वें स्थान पर है। इससे कहा जा सकता है कि यहां के जनप्रतिनिधि व संगठन पदाधिकारी उदासीन हैं। पार्टी सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार बुधवार को पार्टी के प्रदेश संठन द्वारा की गई समीक्षा में रीवा संसदीय क्षेत्र को न्यून सदस्यता से पार्टी के आला पदाधिकारियों ने जमकर फटकार लगायी है। जनप्रतिनिधियों के साथ ही रीवा व मऊगंज के संगठन पदाधिकारियों को प्रदेश भाजपा संगठन द्वारा जमकर सुनाया गया है। प्रदेश भाजपा संगठन के कड़े रुख के बाद स्थानीय जन प्रतिनिधियों व संगठन के पदाधिकारियों के बीच हड़कंप मच गया है। कुछ तो मंडल स्तरीय बैठकें लेकर 25 सितंबर के पूर्व टारगेट पूरा करने के लिए युद्ध स्तर पर जुट जाने के लिए फरमान भी जारी कर दिये हैं। अब देखना यह है कि कौन कौन टारगेट पूरा कर पाता है।
भाजपा अध्यक्षों को मिली वार्निंग
बतादें प्राप्त जानकारी अनुसार प्रदेश अध्यक्ष ने रीवा संसदीय क्षेत्र में सदस्यता अभियान की गति कमजोर होने पर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने पार्टी जिला अध्यक्षों को जमकर फटकार लगाई है। बता दें कि प्रदेश संगठन का मुख्य फोकस रीवा पर है। रीवा में सदस्यता की स्थिति दयनीय युक्ति और बुद्धि से सभी को भाजपा का सदस्य बनाएं : उप मुख्यमंत्री
रीवा भारतीय जनता पार्टी दीनदयाल मंडल की बैठक ग्रीनलैंड मैरिज गार्डन में आयोजित की गई जिसे संबोधित करते हुए प्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि हम सभी भारतीय जनता पार्टी के अनुशासित और निष्ठावान कार्यकर्ता होने के नाते हा 5 वर्षों में अपनी प्राथमिक सदस्यता के साथ ही सक्रिय सदस्यता अभियान को पूरा करते हैं। जो 100 प्राथमिक सदस्य बनाएगा, वहीं पार्टी का सक्रिय सदस्य होगा और सक्रिय सदस्य ही पाटी के पदाधिकारी और विभिन्न मोर्चा प्रकोष्ठों के दायित्व में जाते हैं, इसलिए रीवा विधानसभा के हर मतदान केंद्र में पांच से अधिक सक्रिय सदस्य बने, इसके लिए आपको काम करना होगा। हमें अपनी ताकत को बढ़ने के लिए हर व्यक्ति को भाजपा से जोड़ने का काम करना है। 19 सितंबर को रीवा नगर के अंदर विशेष सदस्यता अभियान चलाया जाएगा। बैठक में नगर निगम के अध्यक्ष बैंकटेश पांडे पूर्व महापौर राजेंद्र ताम्रकार मंडल अध्यक्ष शिवम द्विवेदी योगेंद शुक्ला पार्षद पूजा सिंह ज्योति सिंह कैप्टन नापित बी सेन सहित पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
भाजपा जिला अध्यक्ष निशान बने। बताया यह जा रहा है कि सदस्यता अभियान के पहले ही दिन भाजपा जिला अध्यक्ष रीवा द्वारा 80 हजार लोगों से मिस काल कराकर प्रदेश में पहला स्थान पाने की कोशिश की गई लेकिन ओटीपी के बाद सदस्यता हासिल करने के बाद संख्या महज 8 हजार ही निकली। सदस्यता अभियान की पूरी प्रक्रिया बाद सदस्य संख्या में बढ़ोतरी न होने पर प्रदेश भाजपा ने जमकर खरी-खोटी सुनाई।
यह है टारेगट :भाजपा प्रदेश संगठन द्वारा सत्ता व संगठन के पदाधिकारियों को अलग-अलग टारगेट दिया गया है। जिसमें सांसद को 25 हजार, सभी विधायकों (भाजपा के 7) को 15-15 हजार व भाजपा जिला अध्यक्ष, जिला पंचायज अध्यक्ष व ननि स्पीकार को 10-10 हजार का टारगेट मिला है। इसी तरह पन्ना प्रमुख तक को लक्ष्य दिया गया है। चिंतनीय यह है कि सांसद ने महज दो हजार को सदस्यता दिलाई है। वहीं कोई भी विधायक 5 हजार का आंकड़ा अभी पूरा नहीं कर पाए हैं। जिपं अध्यक्ष निगम अध्यक्ष का भी यही हाल है। नप अध्यक्ष व जनपद अध्यक्ष भी तय टारगेट से कोसों
बंगलों में बैठ कर टारगेट पूरा करने के इंतजार में
चुनाव के समय पर घर-घर, गली-गली भटकने वाले निर्वाचित जन प्रतिनिधि भाजपा का कुनबा बढ़ाने के लिए उन्हीं गलियों में जाने में तौहीन समझ रहे हैं। वह क्षेत्र की जनता के बीच जा ही नहीं रहे हैं तो सदस्य संख्या कहां से बढ़े। डर रहे हैं कि जनता किए गए वादे के संबंध में सवाल न करे। लोग तो पार्टी के सदस्य तभी बनेंगे व जब वह जिन जनप्रतिनिधियों पर अपना विश्वास मत दिये, वे स्वरे उतरें हों या फिर चुनाव जीतने के बीच उनके पास गए हों। दरअसल चुनाव जीतने के बाद अधिकांश जनप्रतिनिधि अपने खुशामदीदों के बीच ही घिरे रह गए, जनता के बीच पहुंचे ही नहीं, जिसने उन्हें इस काबिल बनाया। पाटी का जब डंडा पड़ा तो आसमन के तारे नजर आने लगे। देखना यह है कि पाटी का कुनबा बढ़ाने में कौन-कौन जनप्रतिनिधि व पाटी पदाधिकारी अपनी परीक्षा पास कर पाते हैं।दूर हैं। लिहजा प्रदेश संगठन ने वीडियो कांफ्रेंसिंग से बैठक लेकर सभी को जमकर घुट्टी पिलाई है।








