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सीधी के शिक्षा विभाग में फिर घोटाला,शासकीय स्कूलों के खाते से गायब हुई लाखों की राशि

सीधी के शिक्षा विभाग में फिर घोटाला,शासकीय स्कूलों के खाते से गायब हुई लाखों की राशि

सीधी- जिले का शिक्षा विभाग घोटाले को लेकर एक बार फिर चर्चा में आ गया है। जिले की दर्जन भर शासकीय विद्यालय से लाखों रुपए की राशि  गायब होने का मामला सामने आया है जिसमें विद्यालय प्रबंधन की जानकारी के बिना ही उनके खाते की राशि जिले में संचालित एक स्टेशनरी संचालक के खाते में स्थानांतरित कर दी गई है पूरे मामले के बाद विभाग में हड़कंभ मच गया और आनन फानन में जिला पंचायत सीईओ द्वारा पूरे मामले में जांच दल गठित कर दिया गया है। हालांकि गठित जांच दल को लेकर भी तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

दरअसल जिले की 17 स्कूलों से 7 लाख से ज्यादा की राशि फर्जी तौर पर आहरित हो गई और संस्था प्रमुखों को इसकी जानकारी भी नहीं है। घोटालेवाजों ने प्राचार्यों व प्रधानाध्यापकों को भेजी जाने वाली राशि पोर्टल के माध्यम से गायब कर दी है। जानकारी मिलने पर जब विद्यालयों के संस्था प्रमुखों द्वारा इस मामले की शिकायत की गई तो सीईओ जिला पंचायत व डीईओ ने जांच की जिम्मेवारी ऐसे लोगों को सौंप दी गई है जिनके ऊपर पहले से ही भ्रष्टाचार के आरोप लग चुके है एवं इस फर्जीवाड़े में भी उनकी भूमिका संदिग्ध बताई जा रही  है। गत वित्तीय वर्ष में भी इस मद में कुछ  इसी तरह का ही फर्जीवाड़ा किया गया था जिसकी जांच आज तक पूर्ण नही हो सकी है।

उल्लेखनीय है कि समग्र शिक्षा अभियान अन्तर्गत जिले के दर्जनों विद्यालयों में विद्यालयीन व्यवस्था के लिए सरकार द्वारा छात्र संख्या के हिसाब से विद्यालयों को राशि उपलब्ध कराई गई थी यह राशि नवंबर माह में डीजीजीओवी पोर्टल में स्थानांतरित की गई थी जिसे पोर्टल के जानकार  आईडी पासवर्ड रखने वाले अधिकारी व कर्मचारी द्वारा हड़प लिया गया है। शिकायत पर जांच टीम गठित कर दी गई है जानकारी के अनुसार जिले की 17 – स्कूलों से करीब 7 लाख 4 हजार रूपये फर्जी तरीके से आहरित कर लिया गया  है। बड़ा सवाल यह उठता है कि यह राशि खाते से कैसे ट्रांसफर हुई इस पर जांच टीम तो बैठाई गई है लेकिन जिम्मेवारों को जांच टीम में शामिल कर लीपापोती भी शुरू कर दी गई है।
बताया  गया है कि स्कूल प्राचार्यों व प्रधानाध्यापकों ने जब पोर्टल में देखा तो पता चला कि बिना उनकी जानकारी के ही हजारों रूपये का भुगतान जिला मुख्यालय स्थित बेंडर अमित ट्रेडर्स के खाते में भेज दी गई। सूत्र बताते है कि यह पूरा गोलमाल आईडी पासबर्ड संचालक के द्वारा ही किया गया है। स्कूल शिक्षा विभाग मध्यप्रदेश शासन भोपाल द्वारा शासकीय स्कूलों में आवश्यक स्टेशनरी सहित अन्य कार्यों के लिए समग्र शिक्षा अभियान अन्तर्गतं केन्द्रीय बजट उपलब्ध कराया गया था जिसे फर्जी तरीके से सीधी में संचालित अमित ट्रेडर्स के नाम ट्रांसफर कर दिया गया। जब इसकी जानकारी विद्यालयों के प्राचार्यों व प्रधानाध्यपकों को लगी तो उनके द्वारा विभाग प्रमुखों से उक्त संबंध की शिकायत दर्ज कराई।

इन विद्यालयों की फर्जी राशि आहरित

समग्र शिक्षा अभियान अन्तर्गत शासकीय स्कूलों में आवश्यक सामग्री की खरीद- फरोक्त सहित अन्य आवश्यक कायों के लिए राज्य शिक्षा केन्द्र द्वारा यह बजट उपलब्ध कराया गया था। जिसमें शासकीय हायर सेकण्ड्री स्कूल सुड़वार सिहावल को 75 हजार रूपये, शासकीय हाई स्कूल केशलार कुसमी को 50 हजार, शासकीय माध्यमिक शाला बरौं रामपुर नैकिन 30 हजार, शासकीय हाई स्कूल दुबरी कला 50 हजार, शासकीय हायर सेंकण्ड्री स्कूल बस्तुआ कुसमी 75 हजार, शासकीय प्राथमिक शाला गरियरी तरका सिहावल 22 हजार 500, शासकीय प्राथमिक शाला कनकटी 22 हजार 500, शासकीय माध्यमिक शाला भान टोला सीधी 50 हजार, शासकीय माध्यमिक शाला सारोकला 50 हजार, शासकीय माध्यमिक शाला जिंदहा सीधीं 50 हजार, शासकीय माध्यमिक शाला अंधरी गड़ई सीधी 50 हजार, शासकीय प्राथमिक शाला गांधी ग्राम सीधी 25 हजार, शासकीय माध्यमिक शाला कतरवार कुसमी 29 हजार, शासकीय प्राथमिक शाला कोतमा कुसमी 25 हजार, शासकीय माध्यमिक शाला फुलवा कुसमी 25 हजार, शासकीय माध्यमिक शाला बड़वाही कुसमी 25 हजार एवं शासकीय माध्यमिक शाला लौहार कुसमी के खाते से 50 हजार रूपये आहरित कर लिये गए जिसकी जानकारी संस्था प्रमुखों के पास नहीं है।

जांच टीम में शामिल अधिकारियों पर उठे सवाल…?

प्राचायों व प्रधानाध्यपकों के बिना सहमति व जानकारी के राज्य शिक्षा केन्द्र का बजट संस्था के खाते से आहरित करने की शिकायत पर जिला पंचायत सीईओ राहुल घोटे द्वारा जांच टीम गठित की गई जिसमें भ्रष्टाचार को लेकर सुर्खियों में रहने वाले एपीसी रमशा डॉ. सुजीत मिश्रा को शामिल किया गया है। उक्त समिति के साथ डीईओ द्वारा इसी मामले में गठित जांच टीम में सुजीत मिश्रा को शामिल किया गया है। इनके अलावा सीईओ की टीम में डीपीसी राजेश तिवारी व प्रोग्रामर रवीन्द्र त्रिपाठी तथा डीईओ टीम के सुजीत मिश्रा के अलावा एडीपीसी प्रवीण शुक्ला व एमआईएस विजय सिंह को शामिल किया गया है। हैरानी की बात यह है कि एपीसी रमशा डॉ सुजीत मिश्रा पर पूर्व से ही भ्रष्टाचार के कई आरोप लग चुके है ऐसे में दोनो टीमों में इन्हें शामिल करना यह साबित कर रहा है जांच टीम सिर्फनाम के लिए गठित की गई है कागजी कार्रवाई कर मामले को रफा-दफा कर दिया जायेगा। जिला पंचायत सीईओ व जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा गठित टीम सदस्यों की सूची पर भी सवालिया निशान लग रहा है। जिसकी वजह यह बताई जा रही है कि इस पूरे फर्जीवाड़े का केन्द्र है वह रमशा एवं डीपीसी कार्यालय ही है और उसी विभाग से जुड़े कर्मचारियों को जांच टीम की जिम्मेवारी दे दी गई है। ऐसे में यह आरोप लगाया जा रहा है कि जिनके पास आईडी पासवर्ड सभी संस्थाओं के सुरक्षित रहते है उन्ही को यह जिम्मेदारी देना टीम गठित करने वाले अधिकारियों पर भी सवालिया निशान लग रहा है।

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