मनरेगा मद से मुर्दो के लिए करोड़ों ख़र्च,अनुपयोगी पड़े है शांति धाम
सीधी- महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत ग्रामों में मूलभूत सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शासन द्वारा शान्तिधाम उपयोजना शुरू की गई। वित्तीय वर्ष 2011-12 से अब तक जिले में 685 शान्तिधाम स्वीकृति कर बनाये भी गए। इसके निर्माण के लिए बाकायदा 18.20 करोड़ की स्वीकृति भी दी गयी और कागजों पर 9.57 खर्च कर दिए। लेकिन हकीकत के धरातल पर गांवों में मुक्तिधाम श्मसान को बदहाली से मुक्ति नहीं मिल सकी है। कई गांवों में मुक्तिधाम के जीणर्णोद्धार कार्य कागजों में पूर्ण बताकर राशि हड़प कर ली गई। मुक्तिधाम का काम अधूरा होने के बावजूद भी संबंधित निर्माण एजेंसी को पूरा भुगतान कर दिए जाने पर ग्रामीणों ने इस संबंध में शिकायतें कई बार प्रशासन के अफसरों से की थी। लेकिन धरातल पर न जांच हुई और न दोषियों पर कार्रवाई ही की गई। पंचायतों ने अधूरे और क्षतिग्रस्त टीनशेड की मरम्मत तक नहीं करवाई। वहीं ग्रामीण क्षेत्र में कई जगह श्मसान भूमि पर अतिक्रमण और दबंगों द्वारा श्मसान का रास्ता बंद कर दिए जाने की शिकायतें ग्रामीणों ने प्रशासन के समक्ष रखी। लेकिन अधिकारियों ने समय रहते कोई एक्शन नहीं लिया। परिणामस्वरूप बारिश के बाद गांवों में मृतकों का अंतिम संस्कार करने में ग्रामीणों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत जिले में 2011- 12 से अब तक 685 शान्तिधाम स्वीकृति कर बनाये भी गए। इसके निर्माण के लिए बाकायदा 18.20 करोड़ की स्वीकृक्ति भी दी गयी और कागजों पर 9.57 खर्च कर दिए। जिन कामों पर पैसा खर्च हुआ है उनमें से अधिकांश अधूरे पड़े हैं लेकिन कागजों में इन्हें पूरा बता दिया गया। सरपंच सचिवों ने मुक्तिधाम के नाम पर सिर्फ एक चबूतरा बनवाकर ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग के इंजीनियरों से काम का मूल्यांकन करवाया। खास बात यह है कि इंजीनियरों ने धरातल पर अधूरे निर्माण को कागज में पूर्ण बताकर कार्यपूर्णता का सर्टिफिकेट भी जारी कर दिए थे। सीसी के आधार पर जिला पंचायत से संबंधित ग्राम पंचायत को पूरी राशि का भुगतान कर दिया गया।
किसी काम के नही बचे शांतिधाम
ग्रामीण विकास के लिए सरकार अपनी प्रतिवद्धता के अनुसार धन उपलब्ध करा रही है और उसे स्थानीय तकनीकी अमला व्यय भी कर रहा है पर मनमानी तरीके से। आज यह पूरी की पूरी उपयोजना असफल हो चुकी है एकाध ग्राम पंचायत को छोड़ दें तो लगभग हर ग्राम पंचायत में निर्मित ये शान्तिधाम अनुपयोगी और खराब हो चुके हैं। सामग्री भुगतान के नाम पर करोड़ो खर्च कर घटिया सामग्री का प्रयोग किया गया जिससे शासन की महत्वाकांक्षी और जन सुविधा की योजना बेकार हो गयी। तकनीकी अमले और क्रियान्वयन एजेंसी ग्राम पंचायत ने शान्तिधाम के साथ विकसित की जाने वाली अन्य सुविधाओं को आज तक विकसित नही किया है। शान्तिधाम के साथ समतलीकरण, पहुंच मार्ग, वृक्षारोपण और कूप का निर्माण कहीं नही किया गया है। जिससे इनका उपयोग हुआ ही नहीं।
इतने बने थे शांतिधाम
मनरेगा योजना के तहत जिले की सभी ग्राम पंचायतों में शांतिधाम बनाने के निर्देश मिले थे। जहां कुसमी जनपद में 39 शातिधाम,मझौली में 105, रामपुर नैकिन में 136, सीधी में 209 एवं सिहावल जनपद में 196 शांतिधाम बनाये गए है।और इसके लिए बकायदा 9 करोड़ 57 लाख खर्च कर दिए गए है। जबकि बनाये गए शांतिधाम अनुपयोगी हो चुके है।








