बुजुर्गों की सेवा को समर्पित प्रेरणादायक पहल: कुसमी से निकली तीर्थयात्रा बनी अनुकरणीय मिसाल
सीधी जिले के कुसमी क्षेत्र से एक ऐसी प्रेरणादायक पहल सामने आई है, जो न केवल सामाजिक समरसता का उदाहरण है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक संदेश बन गई है। पूर्व जिला पंचायत सदस्य विवेन्दु वेंकट टांडिया ने अपनी दिवंगत माता स्व. सुमित्रा देवी की स्मृति को समर्पित करते हुए क्षेत्र के 60 वर्ष से अधिक आयु के लगभग 50 बुजुर्गों को एक विशेष तीर्थयात्रा पर भेजा।
छह तीर्थधाम, एक पावन उद्देश्य
यह तीर्थयात्रा मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश और उत्तराखंड के महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों —
???? बाबा बैजनाथ धाम
???? काशी विश्वनाथ मंदिर
???? इलाहाबाद त्रिवेणी संगम
???? अयोध्या श्रीराम जन्मभूमि
???? चित्रकूट धाम
???? मैहर माँ शारदा धाम
के दर्शन के लिए आयोजित की गई थी।
यात्रा के लिए एक विशेष लग्जरी बस की व्यवस्था की गई, जिसमें न केवल यात्रियों के बैठने व विश्राम की सुविधा रही, बल्कि खानपान व चिकित्सा जैसी आवश्यकताओं का भी पूरा ध्यान रखा गया। बस में ही गैस सिलेंडर, बर्तन और भोजन सामग्री उपलब्ध कराई गई, जिससे बुजुर्गों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
मां के अधूरे सपनों को पूर्ण करने का संकल्प
विवेन्दु टांडिया ने इस यात्रा के पीछे की भावना को साझा करते हुए बताया कि, “मैं अपनी माता को जीवन में तीर्थ यात्रा पर नहीं ले जा सका, यह मेरी सबसे बड़ी अधूरी इच्छा थी। अब मेरा जीवन उद्देश्य है कि अधिक से अधिक बुजुर्गों को यह सौभाग्य दिला सकूं।”
22 जून की रात को यात्रा से लौटे, 23 जून को कथा और भंडारा
यह धार्मिक यात्रा 22 जून की रात 7 बजे बुजुर्गों की सकुशल वापसी के साथ सम्पन्न हुई। इसके उपलक्ष्य में 23 जून, सोमवार को प्रातः 8 बजे सुमित्रा कुटुंब, कुसमीपार (नदी के उस पार) में सामूहिक कथा और भव्य महाप्रसाद (भंडारे) का आयोजन किया गया है।
आयोजक कमला टांडिया, विवेन्दु वेंकट टांडिया एवं म.प्र. पुलिस के सोनू इंस्पेक्टर ने समस्त क्षेत्रवासियों से अनुरोध किया है कि वे सपरिवार पधारें और इस पुण्य आयोजन का भाग बनें।
यह एक सेवा नहीं, श्रद्धांजलि है — एक माँ को और पूरे समाज को
यह प्रयास सिर्फ एक तीर्थयात्रा नहीं, बल्कि बुजुर्गों के प्रति आदर, सेवा और सामाजिक उत्तरदायित्व की मिसाल है। यह पहल बताती है कि सच्चा धर्म वही है, जो समाज के सबसे अनुभवशील और उपेक्षित वर्ग को सम्मान और सुख दे सके।








