फर्जी आवेदनों से मतदाता सूची में हेराफेरी का आरोप, चुरहट विधानसभा क्षेत्र में लोकतंत्र पर गंभीर संकट
सीधी (बघवार)चुरहट विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूची में फर्जी आवेदनों के चलते हेराफेरी का आरोप लगा है, जो लोकतंत्र के लिए गंभीर संकट पैदा कर रहा है। यह मामला चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है और निष्पक्षता की मांग को मजबूत करता है। चुरहट विधानसभा क्षेत्र में हो रही इस घटना ने लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करने का खतरा पैदा कर दिया है, जिसका समाधान निकालना अत्यंत आवश्यक है।
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सीधी जिले में एक बड़ा मामला सामने आया है।
यहाँ के चुरहट विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूची से कई लोगों के नाम हटा दिए गए हैं। लोगों का आरोप है कि यह सब फर्जी तरीके से किया गया है। उन्हें लगता है कि जाली हस्ताक्षरों और गलत आवेदनों के जरिए मतदाता सूची से लगभग पचास लोगों के नाम हटाए गए हैं। यह मामला लोकतंत्र की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करता है।
जानकारी मिली है कि यह मामला भाजपा मंडल अध्यक्ष चोरगड़ी के निवासी नीरज मिश्रा से जुड़ा है। उन पर आरोप है कि उन्होंने समाजसेवी महेंद्र शुक्ल के नाम का गलत इस्तेमाल किया और एसडीएम चुरहट को फर्जी आवेदन भेजे। इन आवेदनों में, कई स्थायी मतदाताओं को गलत तरीके से “आपत्तिकर्ता” बताकर उनके नाम मतदाता सूची से हटाने की कोशिश की गई।
सूत्र बताते हैं कि यह एक अकेला मामला नहीं है, बल्कि प्रशासनिक सांठ-गांठ के चलते चुरहट विधानसभा क्षेत्र में हजारों मतदाताओं के नाम हटाए जाने की आशंका है। ग्राम पंचायत पटना के बीएलओ से मिली जानकारी के मुताबिक, जब आवेदन में दर्ज मोबाइल नंबर पर संपर्क किया गया, तो ग्राम पटना के निवासी उमा निवास मिश्रा ने बताया कि महेंद्र शुक्ल को गलत तरीके से आपत्तिकर्ता बनाया गया है और उन्हें इस पूरे घटनाक्रम की कोई जानकारी नहीं थी।
जनपद पंचायत रामपुर नैकिन के उपाध्यक्ष ऋषिराज मिश्रा ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। वे ग्राम पटना के निवासी हैं और उन्होंने कहा कि यह पूरी घटना बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। पूरी प्रक्रिया सुनियोजित और अलोकतांत्रिक है। ऐसे मामलों में नामित भाजपा कार्यकर्ताओं के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। जिन मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश की गई, उनमें अजय सिंह, अजीत सिंह, पुष्पेन्द्र सिंह, ऋषिकुमार मिश्रा, प्रशांत, कृष्णा कांत, वीरेंद्र पांडे, रमेश मिश्रा, राजेन्द्र मिश्रा, उपेन्द्र मिश्रा, रोहित मिश्रा, शरद मिश्रा, संजीव, नारायण और नागेन्द्र उर्फ मन्नू जैसे कई स्थायी निवासी शामिल हैं। इन सभी लोगों के नाम हटाने की कोशिश करना न केवल अन्यायपूर्ण है, बल्कि यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया का भी उल्लंघन है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मतदाता सूची से नाम हटाना एक बहुत ही संवेदनशील काम है। इसमें चुनाव आयोग के नियमों का पालन करना बहुत जरूरी है। अगर किसी का नाम बिना जांच-पड़ताल और सही शिकायत के हटा दिया जाए, तो यह न केवल चुनाव में अपराध है, बल्कि लोकतंत्र के मूल पर भी सीधा हमला है। इस मामले में सबसे गंभीर बात यह है कि जिन लोगों के नाम पर आवेदन किए गए, उन्हें पता भी नहीं था और उनके नकली हस्ताक्षर कर अधिकारियों को गुमराह किया गया।
इस पूरे प्रकरण की जानकारी कलेक्टर सीधी, एसडीएम चुरहट और तहसीलदार रामपुर नैकिन को दे दी गई है। ग्रामीण अंचल में इस खबर से आक्रोश और चिंता का माहौल है। अब सबकी निगाहें प्रशासनिक जांच और चुनाव आयोग की कार्रवाई पर टिकी हैं, ताकि दोषियों को दंड मिले और मतदाता सूची की पवित्रता बनी रहे।








