अज्ञात जानवर का कहर: छह की मौत, गांव में दहशत, यज्ञ और पहरे में बीत रही रातें
बड़वानी, मध्यप्रदेश। जिले के राजपुर विकासखंड के लिंबई गांव में अज्ञात जानवर के हमलों से अब तक छह लोगों की मौत हो चुकी है। गांव में दहशत इस कदर है कि लोग शाम 7 बजे के बाद घरों से बाहर नहीं निकल रहे हैं। 5 मई को शुरू हुए इन हमलों में अब तक 17 लोग और 5 मवेशी घायल हुए, जिनमें से छह ग्रामीणों और चार मवेशियों की मौत हो चुकी है।
ग्रामीणों का दावा है कि यह हमला किसी अज्ञात जानवर, संभवतः लकड़बग्घे का हो सकता है, जिसने ज्यादातर लोगों पर उनके सोते समय मुंह और शरीर के अन्य हिस्सों पर हमला किया। हमले के बाद पीड़ितों के मुंह से झाग निकलना और धीरे-धीरे अंग काम करना बंद कर देना देखा गया।
सरकार की कोशिशें नाकाम, ग्रामीणों ने किया यज्ञ

जानवर की तलाश में सरकार द्वारा भेजे गए ड्रोन, कैमरे और पिंजरे अब तक विफल रहे हैं। वन विभाग की 35 सदस्यीय टीम गांव में 24 घंटे गश्त कर रही है लेकिन न तो जानवर मिला है और न ही कोई ताजा हमला दर्ज किया गया है।
भय और असहायता के इस माहौल में ग्रामीणों ने अपने स्तर पर मंदिरों में पूजा-पाठ और यज्ञ कराए हैं ताकि इस विपदा से मुक्ति मिल सके। महिलाओं ने समूह में मंदिरों में जुटकर प्रार्थनाएं की हैं।
दिल दहला देने वाले हमले
5 मई को हुए शुरुआती हमलों में झेतरिया फलिया के लल्लू अवास्या के बेटे, मंशाराम बघेल, चैनसिंह निगवाल और रायकीबाई समेत अन्य लोग जानवर का शिकार बने। अधिकतर हमले सुबह 4 से 6 बजे के बीच हुए जब लोग खुले में सो रहे थे।

मृतकों के परिजनों का कहना है कि हमले के बाद पीड़ितों को पहले मामूली चोट लगी प्रतीत हुई, लेकिन कुछ ही दिनों में उनकी तबीयत बिगड़ने लगी और मौत हो गई।
वैक्सीन और जांच रिपोर्ट का इंतजार
सीएमएचओ डॉ. सुरेखा जमरे के अनुसार, अब तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं आई है। संभावित रेबीज संक्रमण की जांच के लिए मृतकों की लार और ब्रेन टिश्यू पुणे की लैब भेजे गए हैं, जबकि वैक्सीन के सैंपल हिमाचल के कसौली स्थित राष्ट्रीय औषधि प्रयोगशाला भेजे गए हैं।
राजपुर के बीएमओ डॉ. देवेंद्र रोमडे ने बताया कि 10 में से 8 पीड़ितों को चौथा डोज दे दिया गया है। कुछ लोग अभी ट्रेस नहीं हो सके हैं।
नेताओं की मांग: मुआवजा और नौकरी
मनावर विधायक डॉ. हीरालाल अलावा और पूर्व गृह मंत्री बाला बच्चन ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर प्रशासनिक लापरवाही की जांच, मृतकों को 50 लाख से 1 करोड़ तक का मुआवजा और घायलों को 10-20 लाख की आर्थिक सहायता देने की मांग की है। साथ ही मृतकों के परिजनों को सरकारी नौकरी देने की भी मांग की गई है।
गांव छोड़ने लगे लोग
डर का आलम यह है कि कई परिवार गांव छोड़कर अन्यत्र पलायन कर रहे हैं। मंशाराम के बेटे प्रवीण ने बताया कि उनका पूरा परिवार गांव छोड़ ओझर चला गया है। जब तक जानवर पकड़ा नहीं जाता, वापस लौटना संभव नहीं।
लिंबई गांव आज संकट के दौर से गुजर रहा है। प्रशासन की तमाम कोशिशों के बावजूद अज्ञात हमलावर जानवर की पहचान अब तक नहीं हो सकी है। ग्रामीण डरे हुए हैं और उम्मीद लगाए हैं कि जल्द से जल्द समाधान निकले ताकि वे सामान्य जीवन जी सकें।








