???? “घड़ियालों का हाल जानने सीधी सांसद पहुंचे जोगदहा घाट”
सीधी, 11 जून 2025 | सीधी 24 न्यूज़
सोन घड़ियाल अभयारण्य के जोगदहा घाट पर बुधवार का दिन कुछ अलग ही रहा। घाट पर पानी में अठखेलियाँ कर रहे नन्हे घड़ियालों के बीच पहुंचे सीधी सांसद डॉ. राजेश मिश्रा ने इस दृश्य को देख खुशी ज़ाहिर की और कहा—“ऐसा लगता है जैसे प्रकृति ने हमें मुस्कुराकर जवाब दिया हो।”

संजय टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक अमित कुमार दुबे ने सांसद को बताया कि वर्ष 2015 में आखिरी दो नर घड़ियालों की मौत के बाद यह अभयारण्य ‘नरविहीन’ हो गया था, जिससे प्रजनन थम गया था। फिर 2022 में चंबल से लाया गया एकमात्र नर घड़ियाल 2023 की बाढ़ में बहकर बिहार पहुँच गया, जो तमाम प्रयासों के बाद भी वापस नहीं आ सका।
लेकिन 14 जनवरी 2025 को एक और नर घड़ियाल चंबल से लाकर सिहावल विधायक विश्वामित्र पाठक की उपस्थिति में जोगदहा घाट में छोड़ा गया। इसी का नतीजा है कि मार्च में मादाओं ने अंडे दिए और मई में 132 घड़ियाल शिशुओं ने जन्म लिया।
प्राकृतिक माहौल में केवल 2-3 प्रतिशत बच्चे ही जीवित रह पाते हैं। सांसद ने ज्यादा बच्चों को बचाने के लिए अतिरिक्त प्रयास करने की ज़रूरत पर बल दिया।

क्या है सोन घड़ियाल अभयारण्य?
1981 में गठित इस अभयारण्य की लंबाई 209.21 किलोमीटर है, जो सोन, गोपद और बनास नदियों में फैला है। इसकी चौड़ाई नदियों के दोनों ओर 200 मीटर तक है। वर्ष 2025 की गणना में 38 घड़ियाल, 74 मगर, 41 स्कीमर पक्षी, 4015 पक्षियों की 49 प्रजातियाँ, साथ ही कछुए, मछलियाँ, जल सर्प आदि जीव चिन्हित किए गए हैं।
सिर्फ चंबल नहीं, अब सीधी भी घड़ियालों का घर
मध्य प्रदेश में चंबल के बाद अब सीधी का सोन घड़ियाल अभयारण्य दूसरा ऐसा क्षेत्र है जहां प्राकृतिक प्रजनन सफल हो रहा है। यह संरक्षण कार्य स्थानीय जनप्रतिनिधियों, कर्मचारियों, अधिकारियों और समुदायों की सहभागिता का बेहतरीन उदाहरण बनता जा रहा है।
भ्रमण के दौरान सांसद के साथ डॉ. कैलाश तिवारी, अभयारण्य अधीक्षक सुधीर मिश्रा, परिक्षेत्राधिकारी मनी राम धुर्वे, वनरक्षक जोखीलाल प्रजापति और अन्य कर्मचारी भी मौजूद रहे।








