मध्यप्रदेश में 9 साल बाद कर्मचारियों को प्रमोशन की सौगात! सरकार आज ले सकती है ऐतिहासिक फैसला
लगभग 4 लाख अधिकारियों-कर्मचारियों को मिलेगा लाभ, सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले के बीच नया फार्मूला तैयार
भोपाल, 17 जून 2025 |
मध्यप्रदेश सरकार आज एक बड़ा प्रशासनिक फैसला लेने जा रही है, जिसका इंतजार प्रदेश के लाखों शासकीय कर्मचारियों को पिछले 9 वर्षों से था। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने ‘प्रमोशन का नया फॉर्मूला’ तैयार किया है, जिसे आज कैबिनेट की बैठक में मंजूरी के लिए पेश किया गया है।
???? क्या है मामला?
दरअसल, राज्य में वर्ष 2016 से पदोन्नति (प्रमोशन) पर रोक लगी हुई है। इसकी वजह सुप्रीम कोर्ट में लंबित वह मामला है, जिसमें प्रमोशन में आरक्षण को लेकर कानूनी जटिलता बनी हुई थी। हाईकोर्ट ने 30 अप्रैल 2016 को प्रमोशन नियम 2002 को निरस्त कर दिया था, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट में SLP दायर की गई। कोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए थे, जिससे 9 साल तक पदोन्नति की प्रक्रिया ठप रही।
इस अवधि में 1 लाख से ज्यादा कर्मचारी बिना प्रमोशन के रिटायर हो चुके हैं।
✅ अब सरकार ने क्या किया?
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने तीन महीने पहले संकेत दिए थे कि सभी पक्षों की सहमति से प्रमोशन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके बाद GAD विभाग ने एक नया फार्मूला तैयार किया, जिसका प्रजेंटेशन मुख्यमंत्री, मंत्रियों और विभिन्न संगठनों के समक्ष कई बार प्रस्तुत किया गया।
पिछले सप्ताह 10 जून को हुई कैबिनेट बैठक में भी इस मसौदे को मंत्रियों के समक्ष रखा गया था। अब इसे 16 जून की कैबिनेट बैठक में मंजूरी के लिए लाया गया है।
???? क्या है नया प्रमोशन फॉर्मूला?
???? रिक्त पदों का वर्गीकरण
- खाली पदों को SC/ST और अनारक्षित श्रेणी में बांटा जाएगा।
- पहले आरक्षित वर्ग के पद भरे जाएंगे, फिर शेष पदों के लिए सभी पात्रों को अवसर मिलेगा।
???? दो स्तर की पदोन्नति लिस्ट
- क्लास-1 (उच्च अधिकारी) के लिए मेरिट + सीनियरिटी के आधार पर।
- क्लास-2 और उससे नीचे के पदों के लिए केवल सीनियरिटी के आधार पर।
???? ACR (गोपनीय रिपोर्ट) की अनिवार्यता
- पिछले 2 साल में कम से कम 1 “आउटस्टैंडिंग” रिपोर्ट अनिवार्य।
- या पिछले 7 साल में कम से कम 4 “A+” रिपोर्ट होनी चाहिए।
???? प्रमोशन कब और कैसे होंगे?
- हर साल सितंबर से नवंबर के बीच DPC (विभागीय पदोन्नति समिति) की बैठक होगी।
- पात्रता की गणना 31 दिसंबर की स्थिति के आधार पर होगी।
- 1 जनवरी से पदोन्नति आदेश जारी किए जाएंगे।
चयन प्रक्रिया
- जितने पद होंगे, उसके दोगुना उम्मीदवार बुलाए जाएंगे, +4 अतिरिक्त।
- जैसे 6 पद हैं, तो 16 लोग बुलाए जाएंगे।
⚠️ महत्वपूर्ण निर्देश और सीमाएं
- पहले से प्रमोशन पाए कर्मचारियों को हटाया नहीं जाएगा।
- रिटायर हो चुके कर्मचारियों को यह लाभ नहीं मिलेगा।
- नियम उसी दिन से लागू होगा, जिस दिन इसका नोटिफिकेशन जारी होगा।
- SC/ST पद खाली रहने पर यदि योग्य उम्मीदवार न मिले, तो पद रिक्त रहेगा।
???? विवाद भी जारी: सपाक्स ने जताया विरोध
हालांकि इस फैसले से 4 लाख कर्मचारियों को लाभ मिलने की उम्मीद है, लेकिन सपाक्स (सामान्य, पिछड़ा, अल्पसंख्यक वर्ग अधिकारी-कर्मचारी संस्था) ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि पदोन्नति में आरक्षण अभी भी असमानता पैदा करेगा और इससे अयोग्य उम्मीदवारों को लाभ मिलेगा। दूसरी ओर, अजाक्स (अनुसूचित जाति/जनजाति अधिकारी संघ) ने सरकार के इस प्रयास की सराहना की है।
???? सारांश: क्या बदलेगा इस फैसले से?
| बिंदु | पहले | अब |
|---|---|---|
| पदोन्नति | 9 साल से बंद | हर साल तय समय पर |
| पद वर्गीकरण | विवादास्पद | स्पष्ट आरक्षण फॉर्मूला |
| ACR नियम | अस्पष्ट | स्पष्ट मापदंड |
| प्रक्रिया | कोर्ट केस में अटकी | कैबिनेट मंजूरी की ओर |
????️ मुख्यमंत्री की मंशा साफ
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पहले ही संकेत दिया था कि “सरकार पदोन्नति से किसी को वंचित नहीं रखेगी। न्याय संगत समाधान लाया जाएगा।” अब यह देखना दिलचस्प होगा कि कैबिनेट इस प्रस्ताव को किस स्वरूप में मंजूरी देती है।








