शासकीय साइकिलें गरीब छात्रों तक पहुंचने से पहले ही निजी घर में मिलीं, पुलिस ने दबिश देकर किया भंडाफोड़
???? सिंगरौली | ब्यूरो रिपोर्ट
शिक्षा या धंधा? — सिंगरौली जिले के चितरंगी विकासखंड से आई ये खबर न केवल प्रशासन को झकझोरने वाली है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा करती है कि गरीब छात्रों की हक की योजनाएं आखिर किसके हवाले हैं?
घटना का खुलासा
जानकारी के अनुसार, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय खटाई में अध्ययनरत गरीब छात्रों को वितरित की जाने वाली शासकीय साइकिलें चोरी-छिपे खैरा गांव के एक निजी घर में छिपाकर रखी गई थीं, जिन्हें बाजार में बेचने की तैयारी चल रही थी।

सूचना मिलते ही चितरंगी थाना पुलिस ने तत्काल दबिश देकर सभी साइकिलों को बरामद कर लिया। यह कार्रवाई न केवल प्रशासन की सक्रियता को दर्शाती है, बल्कि शिक्षा संस्थानों में बैठे भ्रष्ट तंत्र की कलई भी खोलती है।
संकुल प्राचार्य पर गंभीर आरोप
सूत्रों के मुताबिक, इन साइकिलों को छिपाकर रखने और बाजार में खपाने की योजना विद्यालय के संकुल प्राचार्य द्वारा रची गई थी। संयोग से प्राचार्य का निवास स्थान भी खैरा गांव में ही है, जहां ये साइकिलें पाई गईं।
चौंकाने वाली बात यह है कि कुछ ही दिन पहले यही प्राचार्य सोशल मीडिया पर अपनी “ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा” के गुणगान करवा रहे थे, लेकिन इस खुलासे ने उनकी वास्तविकता को सार्वजनिक रूप से उजागर कर दिया है।
शासकीय योजनाओं के साथ विश्वासघात
सरकार द्वारा छात्रहित में चलाई जा रही योजनाएं जब इस प्रकार से निजी स्वार्थ की भेंट चढ़ती हैं, तो इससे न केवल छात्रों का भविष्य प्रभावित होता है, बल्कि पूरी शिक्षा व्यवस्था की साख को ठेस पहुंचती है।
स्थानीय ग्रामीणों में इस घटना को लेकर आक्रोश व्याप्त है। लोगों का कहना है कि अगर पुलिस समय रहते कार्रवाई न करती, तो साइकिलें कब और कैसे गायब हो जातीं, किसी को भनक भी न लगती।
पुलिस की कार्रवाई व अगला कदम
चितरंगी पुलिस ने साइकिलों को जब्त कर लिया है और मामले की गंभीरता से जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक तौर पर यह शासकीय संपत्ति के गबन और कदाचार का मामला प्रतीत हो रहा है, लेकिन पुलिस ने कहा है कि जांच पूरी होने के बाद ही आरोप तय किए जाएंगे।
यदि संकुल प्राचार्य की संलिप्तता प्रमाणित होती है, तो उन पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम सहित अन्य धाराओं में कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
???? क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि “ऐसे मामलों में सिर्फ निलंबन या जांच काफी नहीं है। जब तक दोषियों को कठोर दंड नहीं मिलेगा, तब तक गरीब छात्रों के हिस्से की योजनाएं इसी तरह लूटी जाती रहेंगी।”
???? सम्बंधित धाराएं:
भारतीय दंड संहिता की धारा 409 (विश्वासघात कर शासकीय संपत्ति का गबन), धारा 420 (धोखाधड़ी), और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के तहत मामला बन सकता है।








