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सीधी:निर्माणाधीन पुल के पास बने गड्ढे में डूबे दो मासूम भाई, कुचवाही में पसरा मातम

सीधी:निर्माणाधीन पुल के पास बने गड्ढे में डूबे दो मासूम भाई, कुचवाही में पसरा मातम
ठेकेदार की लापरवाही से हुई त्रासदी, जनप्रतिनिधियों ने जताया शोक

सीधी, कुचवाही से विशेष संवाददाता

सीधी जिले के कुचवाही गांव में शनिवार को एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। गांव के निवासी अखिलेश गुप्ता के दो मासूम बेटे, जिनकी उम्र क्रमशः 12 और 9 साल थी, मझरेटी में निर्माणाधीन रेलवे पुल के पास बने गहरे पानी के गड्ढे में डूब गए।
दोनों बच्चे सुबह घर से खेलने निकले थे, लेकिन देर  तक वापस नहीं लौटे। खोजबीन के दौरान ग्रामीणों को निर्माण स्थल के पास पानी में बच्चों के कपड़े और चप्पलें मिलीं। तत्पश्चात बच्चों के शव बरामद किए गए।

लापरवाही बनी मौत की वजह

हादसे का कारण पुल निर्माण स्थल पर की गई घोर लापरवाही को बताया जा रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों और ग्रामीणों के अनुसार:

  • मौके पर कोई सुरक्षा घेरा नहीं था।
  • न तो चेतावनी बोर्ड लगे थे, न ही कोई चौकीदार या निगरानी कर्मी तैनात था।
  • गड्ढे को खुला छोड़ दिया गया था, जिससे बच्चे उसमें गिरकर डूब गए।

ग्रामीणों का आरोप है कि यह सीधे-सीधे ठेकेदार और निर्माण एजेंसी की लापरवाही है, जिसकी वजह से दो मासूमों की जान गई है।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने जताया शोक, कीं मांगें

घटना की सूचना मिलने के बाद क्षेत्रीय विधायक रीति पाठक और जनपद अध्यक्ष धर्मेन्द्र सिंह परिहार द्वारा सीधी स्थित चीर घर पहुंच कर पीड़ित परिवार को सांत्वना दी। विधायक ने शोक जताते हुए कहा कि,कुचवाही के श्री अखिलेश गुप्ता जी के दो पुत्रों के आकस्मिक निधन अत्यंत दुखद व हृदयविदारक है। मेरी संवेदनाएं शोकाकुल परिजनों के साथ हैं।

ईश्वर पुण्यआत्मा को शांति प्रदान करें एवं शोकाकुल परिवार को इस असीम दुख को सहन करने की शक्ति दें।

पूरे घटनाक्रम पर पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल ने सोशल मीडिया के माध्यम से शोक व्यक्त करते हुए कहा कि

सीधी के कुचवाही गाँव में सरकार की लापरवाही और भ्रष्टाचार ने 12 और 9 साल के दो मासूम भाइयों की ज़िंदगी छीन ली।

दोनों बच्चे मझरेटी में निर्माणाधीन रेलवे पुल के पास बने पानी के गड्ढे में डूब गए। पुल के पास न कोई सुरक्षा घेरा था, न चेतावनी बोर्ड, न निगरानी।

यह घटना उन तमाम वादों, भूमिपूजन और नारों पर करारा तमाचा है, जो भाजपा द्वारा झूठे विकास के नाम पर गढ़े गए हैं।

कांग्रेस पार्टी मांग करती है कि दोषियों पर तत्काल कड़ी कार्रवाई हो, पीड़ित परिवार को 50 लाख रुपये का मुआवज़ा दिया जाए, और उस स्थान की तत्काल जांच कराकर गड्ढे को भरा जाए।

उन्होंने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि:

  1. निर्माण कार्य के ठेकेदार और पर्यवेक्षण अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज की जाए।
  2. पीड़ित परिवार को ₹50 लाख मुआवजा दिया जाए और एक परिजन को सरकारी नौकरी दी जाए।
  3. निर्माणाधीन स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था की जिलेभर में जांच कराई जाए।।

खैर यह तो महज एक घटना बन कर हादसे के रूप में दबी फाइल हो जाएगी लेकिन यदि मानवता के नाते पीड़ित परिवार की व्यथा पर गौर करें तो उसका सब कुछ लुटा गया मुआवजा नौकरी कुछ भी उसके नुकसान की भरपाई नहीं कर सकते, आरोपी प्रत्यारोप और शोक संवेदना से इतर होकर सोचे तो कभी आपने सुना है कि ‘विकास’ की एक लापरवाह लकीर, बच्चों की कब्र बन जाए?

 कुचवाही गांव के ये दो मासूम  भाई  सुबह खेलने निकले थे, कभी लौटकर नहीं आए। और फिर कुछ घंटों बाद, मझरेटी में निर्माणाधीन रेलवे पुल के पास बने एक गहरे गड्ढे में उनकी लाशें मिलीं।

वो पुल अधूरा था… जैसे सरकारी वादे अधूरे होते हैं।

उस पुल के पास न कोई बैरिकेटिंग थी, न बोर्ड, न कोई सतर्कता, न जिम्मेदार मौजूद।

सिर्फ एक चीज़ थी — सिस्टम की गूंगी चुप्पी। ये वही चुप्पी है जिसके कारण आम आदमी परेशान हैं,सब देखते समझते हुए भी सही को सही और ग़लत को ग़लत न बोल सकने वाली चुप्पी…?

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