???? ट्रांसफर पॉलिसी पर लगी चोट: आदिम जाति कल्याण विभाग सीधी के तीन कर्मचारी निलंबित, अफसर से मांगा जवाब
सीधी 21 जून 2025
मध्यप्रदेश सरकार की स्थानांतरण नीति 2025 को ठेंगा दिखाने वालों पर प्रशासन ने सख्ती शुरू कर दी है।
सीधी जिले में आदिम जाति कल्याण विभाग के तीन कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है, वहीं विभाग के सहायक आयुक्त को कारण बताओ नोटिस जारी हुआ है।
???? मामला क्या है?
यह पूरा मामला स्थानांतरण आदेशों में अनियमितता से जुड़ा है।
जांच में सामने आया कि जिन कर्मचारियों के ट्रांसफर हुए, उनकी फाइलें नियमों और वरिष्ठ अधिकारियों की मंजूरी के बगैर तैयार की गई थीं। बिना वैध प्रक्रिया अपनाए स्थानांतरण आदेश जारी कर दिए गए।
स्थानांतरण नीति 2025 के प्रावधानों के उल्लंघन को गंभीरता से लेते हुए सीधी कलेक्टर द्वारा आदिम जाति कल्याण विभाग के तीन कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। साथ ही विभाग के सहायक आयुक्त को कारण बताओ सूचना पत्र (Show Cause Notice) जारी किया गया है।
उल्लेखनीय है कि जनप्रतिनिधियों और कर्मचारियों द्वारा स्थानांतरण संबंधी अनियमितताओं को लेकर शिकायतें प्राप्त हुई थीं। इन शिकायतों को गंभीर मानते हुए कलेक्टर द्वारा मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत एवं अपर कलेक्टर को जांच सौंपी गई थी।
जांच में यह तथ्य सामने आया कि आदिम जाति कल्याण विभाग के कर्मचारियों ने वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों की अवहेलना करते हुए स्थानांतरण नस्तियाँ प्रस्तुत कीं, जिनके आधार पर स्थानांतरण आदेश जारी किए गए।
???? निलंबित कौन-कौन?
- उमाशंकर दुबे – लेखपाल
- शिवेंद्र सिंह – सहायक ग्रेड-2
- विनोद पाठक – सहायक ग्रेड-3
इन तीनों पर यह आरोप सिद्ध हुआ है कि इन्होंने नियमों की अनदेखी कर फर्जी या मनमानी स्थानांतरण फाइलें तैयार कीं।
???? जांच कैसे हुई?
- स्थानांतरण में गड़बड़ी की शिकायत जनप्रतिनिधियों और विभागीय कर्मियों ने की थी
- कलेक्टर ने इस पर संज्ञान लेते हुए जांच का जिम्मा अपर कलेक्टर और CEO, जिला पंचायत को सौंपा
- दस्तावेज़ों की विस्तृत जांच की गई — नस्तियों, अनुमोदन, प्रक्रिया सब कुछ
- गंभीर अनियमितताएं सामने आने पर निलंबन और स्पष्टीकरण की कार्रवाई की गई
⚖️ प्रशासन का रुख सख्त
कलेक्टर का संदेश साफ है –
“स्थानांतरण प्रक्रिया पारदर्शी और नीति आधारित होनी चाहिए। इसमें मनमानी करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी।”
???? क्यों महत्वपूर्ण है यह कार्रवाई?
- यह पहला बड़ा मामला है जहाँ स्थानांतरण नीति 2025 के उल्लंघन पर तत्काल प्रभाव से दंडात्मक कार्रवाई हुई
- यह घटना आने वाले समय में अन्य विभागों के लिए भी संदेश स्वरूप मानी जा रही है
- शासन की मंशा है कि स्थानांतरण कोई सौदेबाजी नहीं, बल्कि आवश्यकता आधारित प्रक्रिया हो
???? क्या आगे और नाम आएंगे सामने?
सूत्रों की मानें तो जांच की परतें अभी और खुल सकती हैं। अन्य जिलों में भी स्थानांतरण प्रक्रिया की समीक्षा चल रही है। यदि इसी तरह की अनियमितता और मिलीभगत पाई गई तो अन्य अधिकारियों पर भी गाज गिर सकती है।








