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अवैध रेत के गोरखधंधे ने ली नाबालिग की जान, कागजों में सख्ती–मैदान में ढिलाई उजागर

अवैध रेत के गोरखधंधे ने ली नाबालिग की जान, कागजों में सख्ती–मैदान में ढिलाई उजागर

सीधी-सीधी जिले में अवैध रेत उत्खनन और परिवहन पर कागजी सख्ती की पोल एक बार फिर खुल गई है। मड़वास थाना क्षेत्र के ग्राम टिकरी में अवैध रेत परिवहन के दौरान हुए हादसे में एक नाबालिग आदिवासी किशोर की मौत ने पुलिस और खनिज विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना ने यह साबित कर दिया है कि कागजों में अवैध रेत पर रोक लगाने की कसमें तो खाई जाती हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है।

जानकारी के अनुसार गोपद नदी से लंबे समय से रात के अंधेरे में अवैध रूप से रेत निकाली जा रही थी। इसी अवैध गतिविधि के दौरान ट्रैक्टर से गिरने से नाबालिग उमेश सिंह गोंड की दर्दनाक मौत हो गई। हादसे के बाद गांव में भारी आक्रोश देखने को मिला और ग्रामीणों ने सीधे तौर पर अवैध रेत के धंधे में लिप्त लोगों के साथ-साथ पुलिस और खनिज विभाग की निष्क्रियता को जिम्मेदार ठहराया।

ग्रामीणों का आरोप है कि टिकरी क्षेत्र में अवैध रेत उत्खनन और परिवहन कोई नई बात नहीं है। इसकी जानकारी स्थानीय पुलिस और खनिज अमले को भी है, इसके बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। परिणामस्वरूप नाबालिग और स्थानीय लोग अपनी जान जोखिम में डालने को मजबूर हो रहे हैं।

बताया जा रहा है कि ऐसा ही खेल जमोड़ी थाना क्षेत्र के कुर्वाह इलाके में भी चल रहा है, जहां खुलेआम अवैध रेत का परिवहन किया जा रहा है। वहां भी कार्रवाई सिर्फ दिखावे तक सीमित है। कभी-कभार वाहन पकड़ने या चालानी कार्रवाई कर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।

टिकरी की घटना ने जिले में चल रहे अवैध रेत के नेटवर्क का खुलासा कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कार्रवाई होती तो एक नाबालिग की जान नहीं जाती। अब देखना यह है कि इस घटना के बाद प्रशासन और संबंधित विभाग सिर्फ बयानबाजी तक सीमित रहते हैं या वास्तव में अवैध रेत के धंधे पर प्रभावी अंकुश लगाया जाता है।

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