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Sidhi:कागजो में आहार अनुदान

आहार अनुदान योजना कागजों में सीमित, 3452 बैगा महिलाएं लाभ से वंचित

सीधी/कुसमी। विशेष पिछड़ी जनजातियों के लिए लागू की गई आहार अनुदान योजना का लाभ जमीनी स्तर पर नहीं पहुंच पा रहा है। बैगा और सहरिया परिवारों की महिला मुखियाओं को प्रति माह ₹1500 देने के लिए मध्यप्रदेश शासन द्वारा अक्टूबर 2023 में आदेश जारी किया गया था, लेकिन यह योजना अब तक कागजों में ही दबी हुई नजर आ रही है।

बैगा समाज संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष गौरीशंकर बैगा ने इस मुद्दे को उठाते हुए आरोप लगाया है कि शासन का आदेश जारी होने के बावजूद प्रशासन द्वारा इसका प्रभावी क्रियान्वयन नहीं किया गया। उन्होंने बताया कि कुसमी क्षेत्र सहित सीधी जिले में पंचायतों के माध्यम से महिलाओं के आवेदन फार्म भरवाए गए थे, लेकिन आज तक किसी भी हितग्राही को योजना का लाभ नहीं मिल सका।

उन्होंने यह भी जानकारी दी कि इस संबंध में कई बार मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर अवगत कराया गया है। हाल ही में जिले में आए प्रदेश के राज्यपाल को भी ज्ञापन सौंपा गया, लेकिन इसके बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है।

प्रदेश उपाध्यक्ष के अनुसार, केवल सीधी जिले में ही 3452 पात्र बैगा महिलाएं इस योजना से वंचित हैं, जबकि पूरे प्रदेश में भी विशेष पिछड़ी जनजातियों की यही स्थिति बनी हुई है।

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ग्रामीणों में नाराजगी
ग्राम छलवारी की शांति बैगा, बकवा की रामबाई बैगा, ठाडीपाथर की बसंती बैगा और समितियां बैगा सहित कई महिलाओं ने बताया कि एक वर्ष पूर्व पंचायत के माध्यम से उनके फार्म जमा कराए गए थे, लेकिन अब तक अनुदान राशि नहीं मिली। महिलाओं का कहना है कि “पैसे क्यों नहीं आ रहे हैं और योजना कहां अटकी है, इसकी कोई जानकारी नहीं दी जा रही।”

प्रशासन का जवाब
इस संबंध में जब कुसमी जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ज्ञानेंद्र मिश्रा से संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि आदिवासी विकास विभाग द्वारा ग्राम पंचायतों से बैगा परिवार की महिला मुखियाओं की जानकारी मांगी गई थी, जो उपलब्ध करा दी गई है। साथ ही आवेदन फार्म भी भरवाए गए हैं।

उन्होंने बताया कि जिले में 3452 महिलाएं पात्र पाई गई हैं, लेकिन अभी तक विभाग की ओर से कोई लक्ष्य (टारगेट) या स्पष्ट निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं। जैसे ही ट्राइबल विभाग से दिशा-निर्देश मिलेंगे, तत्काल कार्यवाही की जाएगी।

योजना पर उठ रहे सवाल
लगभग डेढ़ साल बीत जाने के बाद भी योजना का क्रियान्वयन न होना शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। जरूरतमंद महिलाओं को राहत देने के उद्देश्य से शुरू की गई यह योजना फिलहाल ‘हवा-हवाई’ साबित होती नजर आ रही है।

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