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रेत माफिया की मनमानी पर प्रशासन की कमजोर पकड़: सीधी की खदानों पर रोक, फिर भी चल रहा अवैध उत्खनन

रेत माफिया की मनमानी पर प्रशासन की कमजोर पकड़: सीधी की खदानों पर रोक, फिर भी चल रहा अवैध उत्खनन

कुसमी (सीधी)

सीधी जिले में रेत माफिया की दबंगई और प्रशासन की लचर कार्यशैली एक बार फिर सामने आ गई है। जिस ज़िले में खदानों की नीलामी ही नहीं हुई, वहां हजारों घन मीटर रेत का अवैध उत्खनन प्रशासन की आंखों में धूल झोंकते हुए किया जा रहा था। सिंगरौली की लीज पर काम कर रही सहकार ग्लोबल कंपनी ने गोपद नदी में सीमाओं को ताक पर रखकर सीधी की ज़मीन में घुसकर रातों-रात रेत उड़ाना शुरू कर दिया था — वो भी तब, जब सीधी की सभी खदानें न्यायालयीन विवाद के चलते बंद पड़ी हैं।

रविवार को प्रशासन और खनिज विभाग की संयुक्त टीम ने कुसमी क्षेत्र में बड़ी कार्रवाई करते हुए गोपद नदी से एक पोकलेन मशीन जब्त की, जबकि दो अन्य मशीनों के चालक चाबी लेकर मौके से फरार हो गए। इस दौरान करीब 1000 घन मीटर रेत के अवैध उत्खनन का खुलासा हुआ। कार्रवाई दोपहर 1 बजे से रात 8 बजे तक चली, लेकिन सवाल यह है कि इतने लंबे समय तक चल रहे उत्खनन की भनक स्थानीय प्रशासन को अब तक क्यों नहीं लगी?

जानकारी के मुताबिक सहकार ग्लोबल कंपनी, जिसे सिंगरौली की खदान का ठेका मिला है, उसने सीधी की सीमा में घुसकर बेधड़क तरीके से पोकलेन मशीनें उतार दी थीं। ये भी जानना दिलचस्प है कि सीधी प्रशासन जब मौके पर पहुंचा, तो रेत खनन लगभग पूरा हो चुका था — यानी यह कार्रवाई ‘दूध के उबल जाने के बाद बर्तन हटाने’ जैसा प्रतीत हो रही है।

प्रशासनिक टीम में शामिल एसडीएम आरपी त्रिपाठी, तहसीलदार एकता शुक्ला, थाना प्रभारी भूपेश वैस और खनिज निरीक्षक शिशिर यादव ने मौके से एक मशीन ज़ब्त की, लेकिन बाकी लोग फरार हो गए। क्या यह मान लिया जाए कि माफियाओं को पहले से भनक लग गई थी? या फिर कार्रवाई की खबर लीक हो गई?

रेत माफिया न केवल अवैध उत्खनन कर रहे हैं, बल्कि स्थानीय सड़कों को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं। सीधी में अवैध रूट से होकर रेत ले जाने से ग्रामीण मार्ग खस्ताहाल हो गए हैं। पहले भी इस मसले पर प्रशासन को कई बार चेताया गया, लेकिन ठोस कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति ही होती रही है।

अब बड़ा सवाल है — क्या यह कार्रवाई वाकई गंभीर प्रयास है या फिर सिर्फ मीडिया की सुर्खियों के लिए एक “प्रशासनिक इवेंट”?

अगर प्रशासन वाकई में रेत माफियाओं पर लगाम लगाना चाहता है, तो सिर्फ मशीन ज़ब्त करना काफी नहीं, बल्कि पूरे नेटवर्क को उजागर कर कानूनी शिकंजा कसना होगा। वरना माफिया इसी तरह नदियों को खोखला करते रहेंगे, और प्रशासन सिर्फ प्रेस नोट जारी करता रहेगा। हालांकि इन रेत माफिया के साथ राजनीतिक लोगों की सांठगांठ की चर्चा है ऐसे में अब क्या होगा भगवान ही मालिक है।


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