सीधी में ग्राम रोजगार सहायक संघ ने सौंपा ज्ञापन: सेवा शर्तें तय कर नियमितिकरण और लंबित मांगों के शीघ्र निराकरण की मांग
सीधी, 2 जून 2025।
मध्यप्रदेश पंचायतों में लंबे समय से कार्यरत ग्राम रोजगार सहायकों की अनदेखी और असंतोष अब मुखर होने लगा है। सोमवार को “ग्राम रोजगार सहायक संघ – मनरेगा ग्राम रोजगार सहायक महासंघ” और “पंचायत सहायक सचिव कर्मचारी संघ – संयुक्त संगठन म.प्र.” के संयुक्त बैनर तले जिले के सैकड़ों ग्राम रोजगार सहायकों ने जिला मुख्यालय सीधी में प्रदर्शन कर 15 वर्षों से लंबित मांगों को लेकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री के नाम तहसीलदार महोदय को सौंपा गया। साथ ही जिला पंचायत सीधी कार्यालय में भी ज्ञापन प्रस्तुत किया गया।

ग्राम रोजगार सहायकों ने उठाई यह मुख्य मांगे:
- नियमितीकरण की मांग: ग्राम रोजगार सहायकों को पंचायत सचिव की तर्ज पर संविलियन कर एक निश्चित वेतनमान और ग्रेड के तहत सेवा शर्तें निर्धारित की जाएं।
- मृत्यु पर सहायता राशि: सेवा काल में दिवंगत ग्राम रोजगार सहायकों के परिजनों को ₹10 लाख की अनुग्रह सहायता और परिवार के एक सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति की व्यवस्था की जाए।
- पुरानी घोषणाएं लागू हों: 2018 और 2023 में की गई घोषणाओं के अनुसार सेवा शर्तों में परिवर्तन और सेवाकाल की गणना में 50% आयु सीमा छूट का लाभ मिले।
- वेतन समय पर: मासिक मानदेय का भुगतान प्रत्येक माह की 30 तारीख तक सुनिश्चित हो।
- अन्य लाभ भी मिले: वार्षिक वेतनवृद्धि, टी.ए., डी.ए., एलटीसी, एनपीएस सहित सभी सेवाकालीन लाभ दिए जाएं।
- मनरेगा की तरह दर्जा मिले: रोजगार सहायकों को स्थायी और मान्य सेवा मानते हुए मनरेगा कर्मियों की तरह केंद्रीय नीति में शामिल किया जाए।
- जहां पद रिक्त वहां भर्ती: जिन पंचायतों में रोजगार सहायकों के पद रिक्त हैं, वहां पारदर्शी प्रक्रिया से भर्ती हो।
- महिला सहायिकाओं की सुरक्षा: विवाहित महिला सहायिकाओं की स्थानांतरण नीति निर्धारित हो, ताकि पारिवारिक समायोजन संभव हो सके।


मानवता के साथ न्याय की अपील
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि पिछले तीन माह में जिले के 30 से अधिक रोजगार सहायक असमय काल के गाल में समा चुके हैं, लेकिन उनके परिजनों को अब तक न तो अनुग्रह राशि मिली है, न ही अनुकंपा नियुक्ति का लाभ। इससे कर्मचारियों में भारी असंतोष व्याप्त है। उन्होंने चेताया कि यदि शासन-प्रशासन ने जल्द ही सकारात्मक कार्रवाई नहीं की, तो आंदोलन को मजबूरी में उग्र रूप दिया जाएगा।
ज्ञापन के दौरान जिला / ब्लॉक के समस्त पदाधिकारीगण सहित भारी संख्या में रोजगार सहायक उपस्थित रहे।

ग्राम रोजगार सहायक वर्षों से जमीनी योजनाओं के क्रियान्वयन में रीढ़ की हड्डी बने हुए हैं, परंतु उन्हें अब तक कोई स्थायित्व, वेतनमान और सामाजिक सुरक्षा नहीं मिली है। यह ज्ञापन केवल एक औपचारिक दस्तावेज नहीं, बल्कि प्रशासन से न्याय और गरिमापूर्ण सम्मान की पुकार है। शासन यदि इसे नजरअंदाज करता है, तो यह विश्वासघात होगा उन लोगों के साथ जो सबसे निचले स्तर पर देश की योजनाएं लागू कर रहे हैं।








