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???? कुंदौर पंचायत में कागज़ी दुकान का कमाल! बिना माल के भुगतान, भ्रष्टाचार का खेल जारी

???? कुंदौर पंचायत में कागज़ी दुकान का कमाल! बिना माल के भुगतान, भ्रष्टाचार का खेल जारी

✍️ ब्यूरो रिपोर्ट | सिंगरौली | 20 जुलाई 2025

“नाम अर्पिता ट्रेडर्स, काम घोटाले का!”
ग्राम पंचायत कुंदौर (जनपद पंचायत कुसमी) में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि पंचायत सचिव ने बिना कोई सामग्री खरीदे ही अर्पिता ट्रेडर्स को 5 मई को भुगतान कर दिया, जबकि संबंधित बिल क्रमांक 2578 बाद में 31 मई 2025 को प्रस्तुत किया गया

यह केवल तारीखों का हेरफेर नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार की एक सुनियोजित पटकथा प्रतीत होती है, जिसमें सरकारी नियमों और प्रक्रियाओं को ताक पर रखकर सरकारी धन को “कागज़ी दुकानों” में उड़ाया जा रहा है।

???? अर्पिता ट्रेडर्स का पर्दाफाश:
जांच में यह चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है कि अर्पिता ट्रेडर्स नामक दुकान वास्तव में कुसमी में अस्तित्व ही नहीं रखती। यह केवल कागज़ों में संचालित की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, इस दुकान के पीछे जनपद पंचायत में पदस्थ एक कंप्यूटर ऑपरेटर का दिमाग और दबदबा काम कर रहा है। भले ही दस्तावेज़ों में मालिकाना हक किसी अन्य के नाम दर्ज है, लेकिन संचालन, लेन-देन और भुगतान का नियंत्रण उसी ऑपरेटर के पास है।

???? मुख्य आरोप और अनियमितताएँ:

  • 5 मई को बिना माल प्राप्ति के हुआ भुगतान
  • 31 मई को बनाया गया बिल (क्रमांक 2578)
  • दुकान कुसमी में मौजूद नहीं, फिर भी हो रहा है लगातार भुगतान
  • जनपद का कंप्यूटर ऑपरेटर है असली कर्ताधर्ता

???? नियमों की धज्जियाँ:
पंचायतों में “सामान्य क्रय” के लिए पहले सामग्री की प्राप्ति, सत्यापन, और बिल की जांच के बाद भुगतान किया जाना अनिवार्य होता है। लेकिन इस मामले में न नियम बचे, न नैतिकता। सवाल यह भी उठता है कि क्या यह पूरा घोटाला उच्च अधिकारियों की जानकारी में होते हुए भी जारी है?

???? ग्रामीणों का फूटा गुस्सा:
स्थानीय ग्रामीणों ने इस घोटाले की कड़ी निंदा करते हुए उच्च स्तरीय जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि पंचायत में योजनाओं की असल ज़रूरतों को दरकिनार कर इस तरह के फर्जी भुगतान केवल “जेब भरने का जरिया” बन गए हैं।

???? अब सवाल उठता है:

  • क्या प्रशासन इस फर्जीवाड़े पर कार्रवाई करेगा?
  • क्या ऐसे मामलों पर कोई सतर्कता तंत्र काम कर रहा है?
  • कब तक “कागज़ी दुकानों” से जनता का पैसा उड़ाया जाएगा?

यह मामला न सिर्फ वित्तीय गड़बड़ी है, बल्कि जनविश्वास के साथ खुला धोखा है।
यदि कोई ईमानदार जांच हो, तो संभव है कि इस एक मामले से भ्रष्टाचार की एक पूरी चेन सामने आए।

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