मनरेगा उपयंत्रियों की 8 सूत्रीय मांगें — त्वरित समाधान की अपील, आंदोलन की चेतावनी
लक्ष्य आधारित दबाव, वेतन में देरी और अनुबंध नवीनीकरण की अनिश्चितता पर जताया रोष
सीधी। जिले सहित प्रदेश भर के मनरेगा उपयंत्री लंबे समय से अपनी समस्याओं और अधिकारों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। शासन-प्रशासन को बार-बार ज्ञापन एवं पत्र भेजकर अवगत कराने के बावजूद अब तक ठोस समाधान नहीं निकल सका है। उपयंत्रियों का कहना है कि वे वर्षों से मनरेगा योजना में तकनीकी कार्य कर रहे हैं, लेकिन उनके साथ लगातार उपेक्षा और शोषण जैसा व्यवहार हो रहा है।
मुख्यमंत्री सहित उच्च अधिकारियों को सौंपा ज्ञापन
उपयंत्रियों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल, प्रमुख सचिव और मनरेगा आयुक्त को संबोधित ज्ञापन भेजकर अपनी 8 सूत्रीय मांगों का त्वरित निराकरण करने की अपील की है। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि जब तक मांगों पर निर्णय नहीं होता, तब तक उपयंत्रियों को अवकाश प्रदान किया जाए।
ये हैं 8 प्रमुख मांगें
- नियुक्ति दिनांक से संविदा पारिश्रमिक की गणना नियमित उपयंत्रियों के वेतन के समकक्ष की जाए।
- मृत्यु होने पर आश्रित को अनुकंपा नियुक्ति दी जाए।
- पद से पृथक करने के बजाय निलंबन की व्यवस्था लागू हो।
- संयुक्त वरिष्ठता सूची के आधार पर सहायक यंत्री का प्रभार दिया जाए।
- ग्रेजुएटी भुगतान की व्यवस्था हो।
- संविदा सेवा का हर 5 वर्ष पर नवीनीकरण किया जाए।
- उपयंत्रियों से केवल तकनीकी कार्य ही लिया जाए।
- हर माह की पहली तारीख को समय पर वेतन भुगतान सुनिश्चित हो।
उपयंत्रियों की पीड़ा
उनका कहना है कि कार्य का लक्ष्य बढ़ा दिया जाता है, समय पर वेतन नहीं मिलता और वित्तीय वर्ष के अंत में अनुबंध नवीनीकरण की अनिश्चितता बनी रहती है। यह स्थिति मानसिक, आर्थिक और पेशेवर रूप से उन्हें असुरक्षा में धकेल रही है।
चेतावनी — आंदोलन की तैयारी
उपयंत्रियों ने साफ कहा है कि यदि सरकार ने जल्द उनकी मांगों पर निर्णय नहीं लिया, तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। इससे मनरेगा के तहत चल रहे विकास कार्यों पर भी असर पड़ सकता है।
स्थानीय स्तर पर भी समर्थन
जिले के अन्य कर्मचारी संगठनों ने भी मनरेगा उपयंत्रियों की मांगों को जायज ठहराते हुए सरकार से तत्काल सकारात्मक पहल करने की मांग की है, ताकि विकास कार्य बाधित न हों और तकनीकी कर्मचारियों में कार्य के प्रति विश्वास बना रहे।








