सीधी:यूनिपोल होर्डिंग टेंडर में भारी गड़बड़ी के आरोप, लोकल वेंडरों ने खोली नगरपालिका की पोल
सीधी। जिले में यूनिपोल होर्डिंग लगाने की टेंडर प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय होर्डिंग वेंडरों ने नगर पालिका पर नियमों को ताक पर रखकर बाहर के ठेकेदार और एक स्थानीय दलाल को लाभ पहुंचाने का आरोप लगाया है। वेंडरों का कहना है कि यूनिपोल होर्डिंग के टेंडर में भारी झोल किया गया है और नियमों का खुला उल्लंघन हुआ है।
लोकल वेंडरों के अनुसार रीवा के एक ठेकेदार ने फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र लगाकर यूनिपोल होर्डिंग का टेंडर प्राप्त किया है। आरोप यह भी है कि जिस एजेंसी को यूनिपोल निर्माण का कार्य सौंपा गया है, उसने भी फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र प्रस्तुत किए हैं। इसके बावजूद नगर पालिका द्वारा दस्तावेजों की गंभीरता से जांच नहीं की गई, जिससे पूरे टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
व्यापारियों का कहना है कि यूनिपोल होर्डिंग लगाने के लिए जो गाइडलाइन निर्धारित है, उसका भी पालन नहीं किया गया। नियमों के अनुसार यूनिपोल सड़क और फुटपाथ से कम से कम 10 फीट दूर लगाए जाने चाहिए, जबकि सीधी में कई स्थानों पर यूनिपोल सीधे सड़क किनारे खड़े कर दिए गए हैं, जो दुर्घटनाओं का कारण बन सकते हैं। इसके अलावा यूनिपोल की न्यूनतम ऊंचाई 20 फीट होनी चाहिए, लेकिन यहां ऊंचाई और साइज को लेकर भी गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं।
आरोप है कि यह पूरा खेल एक स्थानीय व्यक्ति के संरक्षण में किया गया, जिसके चलते नगर पालिका ने नियमों में हेरफेर कर ठेकेदार को फायदा पहुंचाया। वेंडरों ने यह भी बताया कि टेंडर नवंबर 2024 में खोला गया था, लेकिन ठेकेदार को इसकी सूचना मई 2025 में दी गई, जबकि नियमों के अनुसार 15 दिवस के भीतर सूचना दी जानी चाहिए थी। इसके अलावा टेंडर मिलने के बाद अब तक ठेकेदार द्वारा नगर पालिका को किराया जमा नहीं किया गया, जिससे नगर पालिका को आर्थिक नुकसान हो रहा है।
जिले में लगी होर्डिंग की पूरी टेंडर प्रक्रिया को लेकर प्राइवेट होर्डिंग संचालकों ने कड़ा विरोध जताया है। संचालकों ने नगर पालिका के सीएमओ को ज्ञापन देकर त्रुटिपूर्ण और नियम विरुद्ध टेंडर प्रक्रिया को निरस्त करने तथा अवैध यूनिपोल लगाने पर रोक लगाने की मांग की थी। आरोप है कि इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिसके बाद अब प्राइवेट होर्डिंग संचालक खुलकर सामने आ गए हैं।
व्यापारियों का कहना है कि एक ओर नगर पालिका शहर को सुंदर बनाने के नाम पर सड़क किनारे लगे फ्लैक्स को अवैध बताकर हटाने की कार्रवाई कर रही है, वहीं दूसरी ओर शहर के प्रमुख और भीड़भाड़ वाले इलाकों जैसे अस्पताल चौक, गांधी चौक सहित अन्य स्थानों पर यूनिपोल होर्डिंग खड़ी कर दी गई हैं। नियमों के अनुसार भीड़भाड़ वाले क्षेत्र, स्कूल, पार्किंग स्थल से कम से कम 3 मीटर दूर होर्डिंग लगाने का प्रावधान है, लेकिन गजट के नियमों को दरकिनार कर अमानक रूप से यूनिपोल लगाए जाने का आरोप लगाया जा रहा है।
मामले को और गंभीर बनाते हुए वेंडरों ने यह भी आरोप लगाया है कि जिन स्थानों पर यूनिपोल लगाए जा रहे हैं, वहां भविष्य में फ्लाईओवर निर्माण की योजना है। ऐसे में डीपीआर में लागत बढ़ाकर टेंडरधारी कंपनी को अतिरिक्त लाभ पहुंचाने की आशंका भी जताई जा रही है।
पूरे मामले को लेकर प्राइवेट होर्डिंग संचालकों ने कलेक्टर सीधी सहित जिले के वरिष्ठ अधिकारियों का ध्यान आकर्षित करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। चेतावनी दी गई है कि यदि टेंडर प्रक्रिया निरस्त नहीं की गई और अवैध यूनिपोल हटाए नहीं गए, तो वे न्यायालय की शरण लेंगे।
वहीं इस मामले में नगर पालिका के सीएमओ का कहना है कि शहर में अवैध होर्डिंग हटाने की कार्रवाई की जा रही है और यूनिपोल होर्डिंग का टेंडर विधिवत किया गया है। हालांकि आरोपों के बाद अब प्रशासन और प्राइवेट होर्डिंग संचालक आमने-सामने आ गए हैं। ऐसे में अब यह देखना होगा कि प्रशासन इस पूरे मामले में क्या कदम उठाता है।








