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धान खरीदी केंद्र लकोड़ा में भ्रष्टाचार के आरोप, किसानों से लूट का खेल जारी

धान खरीदी केंद्र लकोड़ा में भ्रष्टाचार के आरोप, किसानों से लूट का खेल जारी

सीधी-
प्रदेश सरकार की धान खरीदी व्यवस्था लकोड़ा उपार्जन केंद्र में सवालों के घेरे में आ गई है। किसानों का आरोप है कि यहां नियम-कायदों को दरकिनार कर खुलेआम मनमानी की जा रही है और समिति सेवक  की भूमिका संदिग्ध बनी हुई है।

साफ धान पर आपत्ति, गंदे धान की खुलेआम खरीदी
किसानों का कहना है कि जब वे साफ-सुथरा और मानक के अनुरूप धान लेकर केंद्र पहुंचते हैं तो उसमें तरह-तरह की कमियां बताकर वापस कर दिया जाता है। वहीं व्यापारियों और प्रभावशाली लोगों का गीला, गंदा और मानकविहीन धान बिना किसी रोक-टोक के खरीदा जा रहा है। इससे ईमानदार किसानों में भारी नाराजगी है।

धान खुले में पड़ा, गुणवत्ता से हो रहा समझौता
खरीदी केंद्र परिसर में धान खुले आसमान के नीचे धूल और मिट्टी में पड़ा रहता है, जिससे उसकी गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। किसानों का आरोप है कि इस गंभीर अव्यवस्था की ओर जिम्मेदार अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे। कभी-कभार होने वाले निरीक्षण भी केवल औपचारिकता बनकर रह जाते हैं।

बोरे की सिलाई में देरी, वजन बढ़ाने का आरोप
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि बोरे की सिलाई जानबूझकर देर से कराई जाती है, जिससे धान में नमी बढ़ जाती है और बोरे का वजन अधिक हो जाता है। इसका सीधा नुकसान किसानों को उठाना पड़ता है। साथ ही समिति सेवक और खरीदी केंद्र के ऑपरेटर तय मानक से अधिक वजन लेने का दबाव बनाते हैं।

विरोध करने पर किसानों को धमकाने का आरोप
किसानों का कहना है कि खरीदी केंद्र में किसी भी तरह की शिकायत या विरोध करने पर भविष्य में धान न खरीदे जाने की धमकी दी जाती है। इसी डर के कारण अधिकांश किसान चुप रहकर शोषण सहने को मजबूर हैं। केंद्र में भय का माहौल बना हुआ है।

कागजों में सब ठीक, जमीन पर हालात अलग
उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार उपार्जन केंद्र सेवा सहकारी संस्था नकोशा, सकोड़ा एवं सेवा सहकारी संस्था लकोड़ा के अंतर्गत केंद्र कोड 2315031 पर कुल 27,085.6 क्विंटल सादा धान की खरीदी दर्ज है। भंडारण केंद्र को 13,595.2 क्विंटल साया धान और 10,344 क्विंटल सादा धान का प्रदाय दिखाया गया है।

भुगतान और खरीदी का लेखा-जोखा
रिकॉर्ड के अनुसार कुल खरीदी राशि 6 करोड़ 41 लाख 65 हजार 626 रुपये बताई गई है। इसमें से 13 लाख 91 रुपये की वसूली दर्शाई गई है, जबकि किसानों को 6 करोड़ 28 लाख 65 हजार 534 रुपये का शुद्ध भुगतान देय बताया जा रहा है।

प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब कागजों में सब कुछ नियमों के अनुसार दिखाया जा रहा है, तो किसानों के साथ खुलेआम यह लूट कैसे हो रही है। जिला प्रशासन की चुप्पी भी संदेह के घेरे में है। किसानों की मांग है कि पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराई जाए और दोषी समिति सेवकों व अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो।

यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो लकोड़ा धान खरीदी केंद्र एक बड़े घोटाले का रूप ले सकता है, जिसकी जिम्मेदारी सीधे तौर पर प्रशासन पर आएगी।

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