पंचायत भवन या “गाली भवन”?
सत्ता के नशे में चूर भाजपा उपाध्यक्ष, पुलिस की नींद गहरी
सीधी। लोकतंत्र का मंदिर कहे जाने वाले पंचायत भवन का नाम अब बदलकर “गाली भवन” रखा जाना चाहिए। वजह साफ है—यहां जनता की समस्याओं का समाधान नहीं, बल्कि चुने हुए प्रतिनिधियों से गालियां और धमकियां मुफ्त में मिल रही हैं।
फोन पर गाली, पंचायत में धमकी
ग्राम पंचायत भितरी, जनपद पंचायत सिहावल के सरपंच प्रतिनिधि और भाजपा मंडल उपाध्यक्ष अवधेश सिंह चौहान पर आरोप है कि उन्होंने ग्रामीण मनीष सोधिया को फोन पर भद्दी गालियां दीं और पंचायत भवन बुलाकर कहा—“जूते से मारूंगा।”

पीड़ित की गुहार, पुलिस की “जांच जारी है”
पीड़ित मनीष का कहना है—“रातभर नींद नहीं आती, घर से निकलना मुश्किल हो गया है, हर जगह गुंडे बैठे हैं।” लेकिन पुलिस वही रटी-रटाई लाइन दोहरा रही है—“ऑडियो के आधार पर एफआईआर दर्ज नहीं होगी, पहले गहन जांच होगी।”
यानी जनता डर से मर जाए, पर पुलिस की नींद न टूटे।
कानून – गरीब के लिए बुलेट ट्रेन, नेता के लिए बैलगाड़ी
याद कीजिए कुछ दिन पहले का मामला—वनांचल क्षेत्र के विधायक पर फेसबुक में टिप्पणी करते ही पुलिस ने अगले दिन युवक को थाने उठा लिया।
लेकिन यहां मामला भाजपा मंडल उपाध्यक्ष का है, तो न एफआईआर, न पूछताछ। सवाल उठता है—क्या सीधी जिले में दो-दो कानून चलते हैं?
पार्टी भी अनजान, जनता परेशान
हैरानी की बात तो यह है कि मंडल अध्यक्ष को ही पता नहीं कि आरोपी उसका उपाध्यक्ष है। जबकि भाजपा जिलाध्यक्ष देवकुमार और बहरी मंडल अध्यक्ष के हस्ताक्षर से यह पद मिला।
अब जनता पूछ रही है—क्या भाजपा संगठन अपने पदाधिकारियों की हरकतों पर आंखें मूंदे बैठेगा?
नया नामकरण – “सम्मान भवन”
ग्रामीणों का तंज—“जब प्रतिनिधि ही धमकी और गालियां बांटने लगें तो पंचायत भवन का नाम बदलकर ‘सम्मान भवन’ रख देना चाहिए, जहां गाली गहना है और धमकी प्रसाद।”
शर्मनाक चुप्पी
इस पूरे मामले ने साबित कर दिया है कि सत्ताधारी नेता चाहे कुछ भी करें, कानून उन पर ‘लागू नहीं’ होता। उससे भी ज्यादा शर्मनाक है पुलिस और प्रशासन की चुप्पी, जो जनता की सुरक्षा के लिए खड़ा होने की बजाय सत्ता के इशारों पर झुक गया है।








